आयकर छापे: कमलनाथ पर सर्जिकल स्ट्राइक...

मध्यप्रदेश की सियासत में अचानक नाटकीय मोड़ आ गया है। वजह राजनैतिक कम भ्रष्टाचार की ज्यादा है। सवाल आयकर छापे की टाइमिंग को लेकर है। मुख्यमंत्री कमलनाथ के लंबे राजनैतिक जीवन में यह पहला मामला है जब उनके सियासी जीवन में तीस-पैंतीस साल से साथ रहे आर.के.मिगलानी भी छापे की चपेट में आ गए। पूरे मामले में पुलिस के पूर्व अधिकारी प्रवीण कक्कड़, एनजीओ चलाने वाले अश्विनी शर्मा से जो जानकारी मिल रही है जब उसके प्याज के छिलके उतारे जाएंगे तो बात दूर तक जाएगी। छापे ओएसडी पर पड़ें है और लहूलुहान कमलनाथ हो रहे हैं। अभी कांग्रेस चुनाव में लगी थी और इस पूरे मामले के कारण फिलहाल तो डिफेंसिव मोड पर आ गई है। पूरा मसला सरकार के भ्रष्टाचार, हवाला और हाल ही में बड़े पैमाने पर हुए तबादलों से जोड़कर देखा जा रहा है। सबसे ज्यादा नुकसान कमलनाथ की छवि को लेकर कांग्रेस को होगा। इसे कमलनाथ पर सर्जिकल स्ट्राइक माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री बनने के बाद कमलनाथ ठीक से कुर्सी पर बैठ भी नहीं पाए तो लोकसभा चुनाव आ गए।बावजूद इसके उन्होंने मंत्रालय में बैठकर प्रशासन पर पकड़ बनाने की कोशिश करने के साथ आक्रामक चुनावी रणनीति अपनाई। इसका लाभ भी कांग्रेस को मिल रहा है। इसी बीच हम गलत सही पर नहीं जा रहे हैं लेकिन प्रवीण कक्कड़ को ओएसडी बनाकर लगता है आज वे जरूर पछता रहे होंगे। दरअसल राजनीति में एक गलती सांप सीढ़ी के खेल की तरह 99 से 9 पर ला सकती है। आयकर की छापामार कार्रवाई में जो रकम मिलने की बात आ रही है वह भले ही आठ दस करोड़ के आसपास है लेकिन अश्विनी शर्मा के दुबई कनेक्शन और उसके दर्जनों मकान और अनेक लक्जरी कारें किसकी मेहरबानी से खरीदी गई और उनका इस्तेमाल कौन करते आ रहे हैं यह भी सियासत खासतौर से चुनाव में चर्चा के मुद्दे बनेंगे। एक खास बात और है शर्मा के आलीशान फ्लेट की सेवाएं भोपाल के कलेक्टर रहे एक वरिष्ठ अधिकारी भी ले चुके हैं। थोकबंद तबादलों के दौरान जब आरोप लगते थे कि फिर यह उद्योग शुरू हो गया है ऐसे में सीएम के ओएसडी कक्कड़ जब डीजी रेंक के अफसरों को पदस्थापना के लिए आदेश सुबह शाम देते थे तो जाहिर है इस मामले में मुख्यमंत्री और उनकी टीम से भी चूक हुई है। भाजपा खासतौर से टीम नरेन्द्र मोदी ने जरूर इन सब चीजों पर गौर फरमाया होगा। छापे की कार्रवाई के निशाने पर करीब पचास से अधिक संदेहियों के आफिस आ गए हैं। गोवा के आफिस तक में आयकर की जांच चल रही है। इस पूरे मामले में मजेदार बात ये है कि एक संदेही के संबंध तो भाजपा के लोगों से भी काफी निकट के हैं। इसमें भाजपा सरकार में रसूखदार सेवानिवृत आईएएस अधिकारी के रिश्ते अश्विनी शर्मा से बताए जाते हैं। शर्मा का दुबई में भी आफिस है और मनीलार्डिंग की अगर इमानदारी से जांच होती है तो भाजपा के कई नेता भी इसकी चपेट में आ सकते हैं। इसलिए छापा मिगलानी, कक्कड़ और शर्मा व अन्य पर डाला गया है लेकिन इसकी दहशत भाजपा में भी महसूस की जा रही है। इस पूरे मामले में सबसे छोटे खिलाड़ी शर्मा पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। यही कमजोर कड़ी साबित होगी जो मिगलानी और कक्कड़ के संबंध में कुछ सबूत के तौर पर इस्तेमाल की जा सकती है।
सत्ता के साथ कई बार गलत निर्णयों के साथ घटिया लोग जब जुड़ते हैं तब बड़े नेताओं का कद घटते और हाईकमान के द्वारा छटते नजर आते हैं। कांग्रेस और कमलनाथ की पालिटिक्स में आयकर के ये छापे चुनाव के नजरिये से टर्निंग प्वाईंट हो सकते हैं। कमलनाथ को लेकर चाहे जो आरोप लगते हों लेकिन उनके सहयोगी पैसे कोड़ी के मामले में उलझे ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। जाहिर है कमलनाथ भी इस मुद्दे पर यह कहते हुए डिफेंसिव ही नजर आ रहे हैं कि मुझे अभी इस मामले में कुछ नहीं पता। दूसरी तरफ भाजपा इस पूरे प्रकरण को सरकार के भ्रष्टाचार का मुद्दा बनाकर सियासी रंग देगी। अगर जांच में कुछ और भी मुद्दे निकलते हैं तो आने वाले दिन कांग्रेसी नेताओं के लिए मुश्किल भरे हो सकते हैं।
मिगलानी,कक्कड़ और शर्मा के साथ कमलनाथ के संबंधियों का नाम आना भी कांग्रेस के लिए फिलहाल अच्छा शगुन नहीं है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मानक अग्रवाल ने मोदी सरकार पर आयकर के छापे को बदले की कार्यवाही बताया है। प्रदेश कांग्रेस में भी कक्कड़ को मिली महत्ता को लेकर पहले ही आश्चर्य था और अब शर्मा के विदेशी कनेक्शन को लेकर चिंता है। कुछ नेता यह भी कह रहे हैं सभी गुटों को एडजेस्ट करने के चक्कर में कई कक्कड़ों की सरकार में सक्रियता बढ़ गई है। छापे की घटना को सबक के तौर पर लेकर छटनी भी शुरू करनी चाहिए। यह काम सरकार के साथ संगठन के स्तर पर भी जरूरी है। क्योंकि संगठन में भी कई कमजोर कड़ियां हैं जो आगे पीछे पार्टी को अपने कर्मों की वजह से परेशान कर सकती हैं। सरकार में आते ही मंत्रियों के सहयोगी के रूप में भी अनेक ऐसे तत्व जुड़ गए हैं जो भाजपा सरकार में भी मलाई खाने में लगे थे।
ऐसई पूछा था... मिला थोड़ा जवाब...
हमने पिछले कालम में ऐसई पूछा था कि आखिर माननीय नेता लोग चौबीस घंटे राजनीति करते हैं और फिर इतना धन कहां से लाते हैं ? ये धन इतना होता है कि दिन रात बिजनेस करने वाले बड़े बड़े घरानों की तुलना में हजारों गुना जेट की स्पीड से बढ़ता है। सवाल का जवाब पूरा तो नहीं मिला लेकिन मोदी सरकार ने मिगलानी कक्कड़ और शर्मा की टीम पर छापा मार इतना तो बता दिया है कि नेताजी और उनके चंपू इस तरह से धन इकट्ठा करते हैं। अभी तो कालीकमाई की बात तबादले शराब को लेकर ही सामने आ रही है। हालांकि ये तो प्याज की एक परत है जो अभी उतरी है। सच में बारीकी से जांच हुई तो कई बेनकाब होंगे और इसमें कांग्रेस के साथ भाजपाईयों की भूमिका भी बराबर की होगी। संभवत: इस छापे की आंच भाजपाईयों तक पहुंचेगी तो पूरा प्रकरण ठंडे बस्ते में चला जाएगा। अभी तो भाजपा का ये चुनावी मास्टर स्ट्रोक था। देखते हैं आगे आगे होता है क्या?  
राघवेंद्र सिंह