मध्यप्रदेश : आखिर कब असर दिखाएगी ‘दीपक’ और ‘कमल’ की नसीहत

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस नेताओं और मंत्रियों से कहा है कि बहुत हो चुका आराम अब काम में जुट जायें। वहीं मध्यप्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राषट्रीय महासचिव दीपक बाबरिया ने भी सख्त लहजे में नसीहत दी कि राजनीति के नाम पर दुकान चलाने वालों पर गाज गिरेगी और जो फूल छाप कांग्रेसी होंगे उन्हें दंडित किया जायेगा। दीपक बाबरिया और कमलनाथ ने मंत्रियों, विधायकों, जिला अध्यक्षों व पार्टी पदाधिकारियों की बैठक में नसीहत के लहजे में उपदेशों की घुट्टी पिलाई। वैसे चाहे सत्ता में भारतीय जनता पार्टी रही हो या मौजूदा दौर में कांग्रेस हो, दोनों के कार्यकर्ताओं, विधायकों और नेताओं को हमेशा इस बात की पीड़ा रहती आई कि मंत्री उन्हें तवज्जो नहीं देते और मैदानी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की कोई पूछ-परख नहीं होती। जहां तक भाजपा का सवाल रहा है तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान संगठन से जुड़े बड़े नेताओं ने समय-समय पर कड़े शब्दों में हिदायतें दी लेकिन उन हिदायतों का कोई असर नजर नहीं आया और अंतत: भाजपा सत्ता से बाहर हो गई। अब देखने वाली बात यही होगी कि बाबरिया और कमलनाथ की नसीहत आखिर कब जाकर असर दिखायेगी तथा जो कार्यकर्ताओं की शिकायतें हैं वे दूर होंगी। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव एवं पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अभी से विधानसभा सत्र प्रारम्भ होने के पूर्व यह संकेत दे दिए हैं कि वे टकराहट की राह पर आगे बढ़ने से भी नहीं चूंकेंगे। भाजपा नेताओं ने कहा कि प्रहलाद लोधी विधायक की सदस्यता बहाल नहीं होती तो विधानसभा के आगामी सत्र में उन्हें हर हाल में सदन में ले जायेंगे। दूसरी ओर जो विधायक नहीं हैं वह सदन में प्रवेश न करे इसका पुख्ता इंतजाम विधानसभा भी करेगी जिसका संकेत संसदीय कार्यमंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने दे दिया है। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव की विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति से इस मुद्दे को लेकर हुई मुलाकात बेनतीजा रही।
कांग्रेस की यह बैठक वैसे तो दिल्ली में 14 दिसम्बर को होने वाले प्रदर्शन के लिए अधिक से अधिक भीड़ जुटाने हेतु रखी गयी थी लेकिन इसमें भी कार्यकर्ताओं की पीड़ा के स्वर सुनाई दिए। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जोर देकर कहा कि अब हम सरकार में हैं इसलिए दिल्ली में हमारी शान बढ़ना चाहिए। उनका इशारा इस ओर था कि मध्यप्रदेश से हजारों की संख्या में वहां जायें और प्रदर्शन में भाग लें। कमलनाथ ने कहा कि यह हमारे लिए इम्तहान की घड़ी है, जनता की हमसे उम्मीदें ज्यादा हैं इसलिए संगठन एकजुट होकर काम करे,ऐसे पदाधिकारी जो बिना सूचना के इस बैठक में अनुपस्थित रहे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अगले तीन-चार दिन में मैनीफेस्टो इम्प्लीमेंटेशन कमेटी का गठन किया जाएगा। वचनपत्र के कार्यों की यह समिति निगरानी करेगी और इसमें सभी वर्ग के लोगों को प्रतिनिधित्व दिया जायेगा, विशेष रुप से वे लोग भी रहेंगे जो वचनपत्र बनाने वाली समिति में थे। कमलनाथ ने यह भी कहा कि अब वह समय गया जब ऐसे आंदोलनों के लिए साधन उपलब्ध कराये जाते थे, अब तो स्वयं ही व्यवस्था करना होगी। जिलाध्यक्षों को उन्होंने राज्य सरकार की उपलब्धियां आम लोगों तक पहुंचाने का आग्रह किया। 14 दिसंबर के पूर्व मप्र के सभी जिलों में 25 नवम्बर को जिला स्तर पर प्रभावी प्रदर्शन करने के लिए भी जिलाध्यक्षों को नसीहत दी गयी। पदाधिकारी इसी बीच अपनी उपेक्षा का रोना रोने लगे तथा यहां तक कहा गया कि पन्द्रह साल तक पार्टी के लिए लाठियां खाईं अब सरकार आई तो मंत्री ही नहीं सुनते। उनकी पीड़ा जायज है इसका अंदाजा इस बात से भी लगता है कि यह कहा गया कि हमने पन्द्रह साल तक विपक्ष में रहकर पार्टी के लिए संघर्ष किया है, उस समय तो हमारी सुनवाई नहीं हुई लेकिन अब जबकि हमारी सरकार है तब भी हमारी सुनवाई नहीं हो रही, मंत्री हमारी बात नहीं सुन रहे, क्या हम उसी तरह उपेक्षित रहेंगे जैसे पिछले पन्द्रह साल रहे। जिस बैठक में कार्यकर्ताओं ने अपनी पीड़ा का इजहार किया उसका महत्व इसी से समझा जा सकता है कि इसमें मुख्यमंत्री कमलनाथ, राष्ट्रीय महासचिव भारत सिंह सोलंकी भी उपस्थित थे। राष्ट्रीय महासचिव सोलंकी ने दिल्ली में होने वाले कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर के प्रदर्शन तथा हल्लाबोल महारैली की जानकारी दी। इस प्रदर्शन के लिए सोलंकी राष्ट्रीय प्रभारी नियुक्त किए गए हैं जिसके चलते ही वे विभिन्न राज्यों में पहुंच कर तैयारियों की बैठक ले रहे हैं। बाबरिया ने इस महारैली में प्रदेश कांग्रेस को लगभग 50 हजार कार्यकर्ताओं को ले जाने का लक्ष्य दिया। सभी जिलाध्यक्षों से कहा गया कि वे एक-एक हजार कार्यकर्ताओं को लेकर दिल्ली पहुंचेंगे तो टारगेट पूरा हो सकता है। जिलाध्यक्षों ने अपनी मजबूरी बताते हुए कहा कि हमारे कहने पर भीड़ नहीं जुटेगी, इसके लिए जिले के प्रभारी मंत्रियों को भी मोर्चा संभालना होगा।
इस बैठक मे यह भी सुझाव दिया गया कि आठ-दस वर्षों से जो जिलाध्यक्ष बने हुए हैं या एक ही पद पर जमे हुए हैं उन्हें हटाया जाए। संघर्ष करते हुए पन्द्रह साल बीत गये, अब अपने खर्च से आंदोलन नहीं होगा, जिला इकाइयों को फंड भेजें। ऐसे कांग्रेसी -फूल छाप- जिन्होंने भाजपा शासन के दौरान मौज किए और अब सत्ता सुख पाने की लिए घुसपैठ करने लगे उन पर लगाम लगाई जाए। बाबरिया ने जरुर भरोसा दिलाया कि ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जायेगी। लेकिन कांग्रेस कार्यकर्ताओं की असली पीड़ा यह है कि कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विगत डेढ़ दशक में भाजपाइयों से व्यावसायिक या अन्य तरह के रिश्ते हो गए थे, वे उस समय तो निष्क्रिय थे लेकिन अब सक्रिय हो गए हैं। ऐसों को ही फूल छाप कांग्रेसी कहा जाता है। कांग्रेस के सत्ता में आने के साथ ही इस प्रकार का बदलाव वैसे तो बाबरिया हमेशा सख्त तेवर दिखाते रहे हैं लेकिन उसका कोई असर मैदानी स्तर पर नजर नहीं आया है। यह तो आने वाले कुछ समय बाद ही पता चलेगा कि बाबरिया के सख्त लहजे का कितना असर हुआ और मंत्रियों की कार्यप्रणाली, बॉडी लैंग्वेज एवं कार्यकर्ताओं से संपर्क करने में कितना बदलाव हुआ है।
और यह भी...
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति से चर्चा कर उनसे इस बात का अनुरोध किया कि वे प्रहलाद लोधी की सदस्यता को बहाल करें, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इससे इन्कार कर दिया। नेता प्रतिपक्ष की जिद है कि बर्खास्त विधायक को करायेंगे सदन में प्रवेश तो संसदीय कार्यमंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने उसी लहजे में कहा कि, कानून अपना काम करेगा। डॉ. सिंह का कहना है कि लोधी अब सदन के सदस्य नहीं हैं, उन्हें प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। लोक निर्माण मंत्री सज्जन वर्मा ने भी तीखी प्रतिक्रिया में कहा कि लोधी ने प्रवेश करने की कोशिश की तो विधानसभा अध्यक्ष मार्शल को आदेश देकर उन्हें विधानसभा से बाहर करवाने की कार्रवाई कर सकते हैं। प्रजापति ने भार्गव को साफ कर दिया कि अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ही कुछ हो पायेगा, इसलिए वे इसके पूर्व कोई इजाजत नहीं दे सकते। प्रजापति ने कहा है कि वे भाजपा के आरोपों से अत्यन्त दुखी हैं, संवैधानिक पद पर बैठे किसी व्यक्ति पर ऐसे आरोप लगाना उचित नहीं है। नेता प्रतिपक्ष से टेलीफोन पर चर्चा हुई थी, उस दौरान क्षेत्र में कुछ कार्यक्रम थे इसलिए भोपाल नहीं आ पाये। उनके लिए सभी विधायक समान हैं और वे कोई भी निर्णय पक्षपात से नहीं लेते। जहां तक भाजपा का सवाल है अब वह अपने अगले कदम के बारे में केंद्रीय नेतृत्व से परामर्श कर आगे की रणनीति बनायेगी।
- अरुण पटेल
- लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं।
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