तू डाल-डाल मैं पात-पात की राह पर आगे बढ़ते कांग्रेस-भाजपा

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में कांग्रेस सहित समूचा विपक्ष सड़कों पर उतरा है। इस बीच केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने एनपीआर के लिए बजट में प्रावधान कर दिया और जहां केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह साफतौर पर कह रहे हैं एनपीआर और सीएए का एनआरसी से कोई सम्बन्ध नहीं है वहीं विपक्षी दल यह आरोप लगा रहे हैं कि एनपीआर का अगला स्टेप एनआरसी ही होगा। इसके विरोध में समूचे देश सहित अब मध्यप्रदेश का राजनीतिक फलक भी गरमाने लगा है। देह कंपाने वाली शीतलहर के बीच तपन महसूस की जाने लगी है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ की अगुवाई में मंत्रियों सहित बड़ी संख्या में कांग्रेसजन एवं समाज के विभिन्न वर्गों के लोग सड़कों पर उतरे तथा इसका विरोध किया। राजधानी भोपाल में हुए कांग्रेस के ‘शांति मार्च’ में सभी धर्मों के लोग शामिल हुए और उन्होंने सदभावना का संदेश देने की कोशिश की। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने दो टूक शब्दों में कहा कि मध्यप्रदेश में ऐसा कोई कानून लागू नहीं होगा जो संविधान, समाज, धर्म या जनविरोधी हो। संशोधित नागरिकता कानून सीएए के समर्थन में इसकी हकीकत जनता को बताने के लिए भारतीय जनता पार्टी भी घर-घर दस्तक देगी एवं इसके महत्व को रेखांकित करेगी। पन्द्रह जनवरी-20 तक यह अभियान चलेगा। केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि विपक्षी दलों के मुख्यमंत्री यह कहकर लोगों को गुमराह कर रहे हैं कि हम इस कानून को अपने राज्य में लागू नहीं होने देंगे। यह एक संविधान संशोधन है इसलिए कोई भी राज्य इसे लागू करने से इन्कार नहीं कर सकता। कुल मिलाकर साल के जाते-जाते जो राजनीतिक फिजा गरमाई थी वह इस मुद्दे को लेकर नये साल में भी जारी रहेगी और कांग्रेस और भाजपा इस दौरान तू डाल-डाल मैं पात-पात को चरितार्थ करते नजर आयेंगे।
मध्यप्रदेश की राजनीति में जबसे कमलनाथ ने सहयोगियों के भरोसे कांग्रेस सरकार बनाई है उसी समय से भाजपा और कांग्रेस में इस बात की होड़ लगी है कि दोनों एक-दूसरे की तुलना में प्रदेश में अपनी पकड़ मजबूत है का दावा कर रहे हैं और कोई भी अपने आपको नहला मानने को तैयार नहीं है बल्कि दहला ही समझते हैं। हालांकि अभी तक तो कमलनाथ ही नहले पर दहला साबित होते आये हैं लेकिन ताजा अभियान के बाद कांग्रेस एवं भाजपा में से कौन दहला साबित होगा यह नये साल में होने वाले विधानसभा के जौरा उपचुनाव जो कि कांग्रेस विधायक बनवारीलाल शर्मा के निधन से रिक्त हुए स्थान की पूर्ति के लिए होगा, उसके नतीजों और नगर निगमों व नगरपालिकाओं सहित शहरी निकायों और पंचायती राज संस्थाओं के तहत होने वाले चुनावों के नतीजों के बाद ही पता चल सकेगा। कांग्रेस का पैदल मार्च जिसमें हजारों की संख्या में हाथ में तिरंगा झंडा और सिर पर गांधी टोपी लगाये लोग शामिल थे, वह 25 दिसम्बर को रंगमहल चौराहे से आरंभ होकर मिन्टो हाल में गांधी प्रतिमा के सामने समाप्त हुआ। इस मार्च में धर्मगुरुओं सहित कई सामाजिक संगठनों ने भी शिरकत की।
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि हम एनपीआर तो चाहते थे लेकिन एनआरसी नहीं। हर मंच पर देश भर में इसका विरोध हो रहा है। कमलनाथ ने कहा कि सरकार को बिगड़ती अर्थव्यवस्था, बेरोजगारी, निवेश नहीं आने की चिन्ता नहीं और उस पर संसद में बात नहीं की जाती, इन्हीं समस्याओं से ध्यान बंटाने के लिए नागरिकता संशोधन के बाद एनआरसी को लाया जायेगा। सरकार की मंशा पर सवालिया निशान लगाते हुए उन्होंने कहा कि नागरिकता कानून तथा एनआरसी में जो लिखा है उसकी नहीं बल्कि जो नहीं लिखा है उसकी चिन्ता है, सरकार की टेबल के नीचे जो लक्ष्य है उसकी चिन्ता है, इसके उपयोग की नहीं बल्कि दुरुपयोग की चिन्ता है। कमलनाथ ने मीडिया से चर्चा करते हुए उक्त बातें कहीं। भाजपा द्वारा न्याय यात्रा को संविधान संकट यात्रा करार दिए जाने के संबंध में पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कोई संकट मार्च नहीं, कांग्रेस की चिन्ता और केंद्र की नियत को लेकर है। उनका कहना था कि सरकार ने टेबल की नीचे इसका लक्ष्य तय किया हुआ है, उसने इसमें यह तो लिख दिया कि कानून में क्या है लेकिन इसमें यह स्पष्ट नहीं किया कि इसमें क्या नहीं होगा, कांग्रेस व हमारे सहयोगी दल संविधान की रक्षा के लिए आये हैं।
घर-घर बताया जायेगा सीएए का महत्व
कांग्रेस की न्याय एवं शांति यात्रा के प्रत्युत्तर में भाजपा जागरुकता अभियान चलायेगी और 15 जनवरी तक प्रदेश में घर-घर जाकर इसका महत्व बतायेगी। इस अभियान के तहत 30 दिसम्बर को ट्वीटर पर भाजपा सहित इस कानून के समर्थक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को बधाई देंगे। यह निर्णय प्रदेश भाजपा की कोर समिति की बैठक में लिया गया। बैठक और निर्णय को भाजपा कितनी गंभीरता से ले रही है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान तथा राष्ट्रीय महामंत्री कैलाश विजयवर्गीय, सांसद एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा और प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव एवं केंद्रीय राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते सहित प्रदेश महामंत्री सुहास भगत, डॉ नरोत्तम मिश्रा और सीतासरण शर्मा भी बैठक में मौजूद रहे। सुहास भगत ने इस बात पर जोर दिया कि जिला अध्यक्ष और जनप्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों में कम से कम 25 गोष्ठियां करें, जिला केंद्रों पर गोष्ठियां आयोजित की जायें तथा समाज के विभिन्न लोगों से समर्थन में हस्ताक्षर भी कराये जायें। सांसद विस्थापित परिवारों के साथ कार्यक्रम भी करें। बैठक में मौजूद नेताओं का कहना था कि नागरिकता संशोधन कानून के बारे में विपक्षी दल देश की जनता को गुमराह करने का काम कर रहे हैं। वोटों की राजनीति के लिए वे जानबूझकर भ्रम फैला रहे हैं। हमें कानूनी सच्चाई को जनता के सामने लाकर इस भ्रम को दूर करना है, यह एक वैचारिक युद्ध है और हमें मैदान में आकर इस लड़ाई को जीतना है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे ने जनप्रतिनिधियों से कहा कि इस विचार-युद्ध में उतरने से पहले यह विचार करें कि जो लोग नागरिकता संशोधन का विरोध कर रहे हैं उसकी राजनीति क्या है। हमारी सरकार की राष्ट्रनीति क्या है और इस वैचारिकत युद्ध में जीत हासिल करने के लिए युद्ध में हमारी रणनीति क्या हो। कांग्रेस तमाम अल्पसंख्यकों के मन में भय पैदा करके वोटों की राजनीतिक करती रही है इसके चलते ही असम में घुसपैठ कराई गई और पश्‍चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी घुसपैठियों का समर्थन कर रही हैं। केंद्रीय मंत्री तोमर ने कहा कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश के धार्मिक आधार पर प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को न्याय देना हमारे घोषणापत्र का हिस्सा रहा है और इसी के आधार पर जनता ने हमें बहुमत दिया है। जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए ही हमारी सरकार ने कठोर निर्णय लिया है और सच को जनता के सामने लायें इससे विश्‍वास बढ़ेगा। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने अल्पसंख्यकों को भरोसा दिलाया कि पार्टी किसी भी तरह से भारत में रहने वाले मुसलमानों के विरोध में नहीं है, कांग्रेस केवल भ्रम फैला रही है। भारत विभाजन के समय महात्मा गांधी और बाद में जवाहरलाल नेहरु, पट्टाभि सीतारमैया सहित अनेक नेता कहते रहे कि जो हिन्दू व अन्य अल्पसंख्यक पाकिस्तान में रह गये हैं वे भारत आना चाहते हैं वे आ सकते हैं, उनकी सुरक्षा व जीवन यापन का दायित्व भारत सरकार का होगा, लेकिन कांग्रेस सरकारों में इस वायदे पर अमल नहीं हुआ। जो महात्मा गांधी व नेहरु ने कहा था उसे मोदी सरकार ने पूरा किया है।
और यह भी...
भाजपा के नेता व कार्यकर्ता तो 15 दिनों तक चलने वाले अभियान की पृष्ठभूमि में पूरी तरह सक्रिय एवं मैदान में नजर आयेंगे। वहीं सूत्रों के अनुसार इस बात पर विचार चल रहा है कि सीएए का समर्थन के अभियान को राजनीतिक अभियान बनाने से बचाया जाये तथा जो रैलियां एवं गोष्ठियां आयोजित हों वे भाजपा के बैनर तले नहीं बल्कि समान विचारधारा वाले सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों की अगुवाई में हों और उन्हें आगे रखा जाए तथा पृष्ठभूमि में इन्हें सफल बनाने में भाजपा अपनी पूरी ताकत झोंक दे। वैसे कांग्रेस के मार्च में भी जगह-जगह राष्ट्रीय ध्वज नजर आये थे और इसमें सभी वर्गों व समाज के लोगों सहित अन्य समान विचारधारा वाले बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया था।
- अरुण पटेल
- लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं।