मॉब लिंचिंग : हंगामा नहीं सूरत बदलने पर जोर दें राजनेता

धार के मनावर में दिनदहाड़े मॉब लिंचिंग की घटना में मुख्यमंत्री कमलनाथ के निर्देश पर त्वरित कार्रवाई की गई। जिम्मेदार पुलिस कर्मी भी इसकी चपेट में आने से नहीं बच सके। मध्यप्रदेश शांति का टापू रहा है और ऐसे परिवेश में इस प्रकार की घटना दुखद और शर्मनाक है, लेकिन कम से कम अन्य राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश सरकार ने अलग नजरिया अपनाते हुए कड़ी कार्रवाई की है। मॉब लिंचिंग के मामले में सड़क से लेकर सदन तक हंगामा खड़ा करने की कोशिश होगी लेकिन इस मामले में मशहूर कवि दुष्यन्त कुमार की इन पंक्तियों को सत्तापक्ष एवं विपक्ष दोनों को ध्यान में रखना चाहिए जिसमें उन्होंने कहा था कि -हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं सूरत बदलनी चाहिए। राजनेताओं के लिए यह किसी परीक्षा की घड़ी से कम नहीं है कि एक-दूसरे पर बढ़त लेने की जगह ऐसी घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं इस पर चिन्तन-मनन किया जाए, क्योंकि यह कानून व्यवस्था के साथ ही एक बड़ी सामाजिक समस्या है। पिछले पांच-छ: सालों से इस प्रकार की घटनाएं देश में बढ़ रही हैं, इसका एक कारण यह है कि राजनीतिज्ञ शार्टकट राजनीति के चलते इस प्रकार का माहौल पैदा कर रहे हैं जिससे कि लोगों में उत्तेजना बढ़ रही है और वे अधीर हो रहे हैं। समाज में किस प्रकार जागृति पैदा की जाए इस बारे में गंभीर चिन्तन-मनन कर जो प्रदूषित वातावरण बन रहा है उसे दूर करने सभी राजनीतिक दल आगे आयें।
मॉब लिंचिंग की घटनाएं बढ़ती हुई हिंसक प्रवृत्ति और लोगों में व्यवस्था के प्रति कुंठा होने के कारण अधिक घट रही हैं। जिस प्रकार के बयान दिए जा रहे हैं उससे प्रेरित होकर लोग स्वयं कानून अपने हाथ में लेकर न्याय करने लगे हैं। नेताओं का बड़बोलापन या जिस प्रकार का माहौल देश में बनाने की प्रवृत्ति दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है वह इस प्रकार की घटनाओं की जड़ है। जिस ढंग से सोशल मीडिया एवं व्हाटसएप पर अफवाह का तन्त्र फलफूल रहा है और लोग उसके द्वारा परोसी गयी उत्तेजक अफवाह की हवा में बह जा रहे हैं, कौवा कान ले गया है तो लोग कौवे के पीछे भाग रहे हैं अपना कान नहीं देख रहे। इसके जो कारण है उसका निदान करने के लिए सत्तापक्ष एवं विपक्ष दोनों को एक राय बनाकर समाज में बढ़ती हिंसक प्रवृत्ति को तिरोहित करने के लिए जन जागरण करना चाहिए। आरोप प्रत्यारोप तात्कालिक भले ही किसी को फायदा पहुंचा दें लेकिन इससे असली नुकसान समाज को हो रहा है जिसकी मानवीय संवेदनाएं शुष्क होती जा रही हैं। एक ओर नागरिकों में जवाबदेही और सामाजिक सरोकारों के भाव पैदा करना जरुरी है तो वहीं दूसरी ओर अफवाह फैलाने वाले तन्त्र पर पैनी नजर रखते हुए पुलिस के सायबर सेल को फौरन कड़ी कार्रवाई करने में कोई कोताही नहीं बरतना चाहिए। इस समय अफवाह तन्त्र पूर्व की तुलना में कुछ ही मिनटों में फैल जाता है क्योंकि इसे संचार क्रांति ने आसान बना दिया है। इस प्रकार की उत्तेजक और समाज में विद्वेष फैलाने वाली विषय वस्तु को परोसने वाले लोग वास्तव में लोगों की बुद्धिमत्ता की परीक्षा लेते हैं। यह हमारी समझदारी के लिए भी चुनौती है, इससे कैसे निपटा जाए इस पर भी विचार होना चाहिए।
इस समय लोगों के पास काम नहीं है, पैसा नहीं है और महंगाई निरन्तर बढ़ रही है जिसके कारण आदमी कुंठाग्रस्त होकर हताशा की ओर बढ़ रहा है। वह कहीं न कहीं अपना गुस्सा निकालने को तैयार है और जहां भी मौका मिलता है वहां उसे निकालने लगता है बिना यह सोचे कि ऐसा करना चाहिए या नहीं। दूसरे न्याय व्यवस्था और न्यायदान की प्रक्रिया इतनी लम्बी है कि उसने धीरे-धीरे लोगों में यह भाव पैदा कर दिया है कि व्यवस्था में न्याय आसानी से नहीं मिल सकता, इसलिए वह स्वयं तत्काल न्याय पाने की प्रत्याशा में कानून अपने हाथ में लेने से नहीं हिचकता। हालात कैसे बदलें और जो यह भाव पैदा हो रहा है उसे जब तक दूर नहीं करेंगे मॉब लिंचिंग की घटनाएं होती रहेंगी। यह कानून व्यवस्था के साथ ही एक बड़ी सामाजिक समस्या भी है इसलिए इसे समझ कर ही हल किया जा सकता है। भाजपा इस मामले को लेकर आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए कमलनाथ सरकार की तगड़ी घेराबंदी करने के प्रयासों में जुट गई थी लेकिन अब उसे थोड़ा बहुत बैकफुट पर आना पड़ेगा, क्योंकि इसके मूल में उसके ही एक नेता का नाम सामने आ गया है। प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष शोभा ओझा ने भाजपा को आइना दिखाने की कोशिश करते हुए कहा कि उसके लिए यह राजनीति का नहीं शर्म का विषय होना चाहिए, क्योंकि अधिकांश मॉब लिचिंग की घटनाओं में भाजपा से जुड़े लोगों के नाम ही अब तक सामने आते रहे हैं। मनावर की स्तब्ध कर देने वाली घटना में भाजपा नेता और ग्राम बोरलई के सरपंच रमेश जूनापानी का नाम सामने आया है। इस हृदय विदारक घटना में आरोपी भाजपा नेता की गिरफ्तारी के बाद शिवराज सिंह चौहान और भाजपा की कथनी व करनी का अन्तर तो स्पष्ट हुआ ही है उसका असली चाल, चरित्र व चेहरा जनता के सामने उजागर हो गया है।
धार जिले की इस घटना को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर आरम्भ हो गया है। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव का आरोप है कि धार जिले में हुई यह तालिबानी घटना समाज को शर्मसार करने वाली है, मध्यप्रदेश किस ओर बढ़ रहा है यह घटना उसकी शुरुआत है। विधानसभा के बजट सत्र में इस घटना को उठाया जायेगा। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी कमलनाथ सरकार पर प्रदेश को तालिबानी प्रदेश बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस धर्म व जाति देखकर कार्रवाई कर रही है। जो लोग पैसा वापस लेने जा रहे थे वहां खतरा है, ऐसा वे पुलिस को बताकर गए थे लेकिन पुलिस सोती रही। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने भी कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया देते हुए घटना को मॉब लिंचिंग का तालिबानी स्वरुप बताते हुए कठोरतम कार्रवाई करने का सरकार से आग्रह किया है। उनका कहना है कि मॉब लिंचिंग की ऐसी घटनाएं किसी भी सभ्य समाज में स्वीकार नहीं की जा सकतीं। राकेश सिंह ने इस घटना को प्रदेश सरकार के उदासीन रवैये का परिणाम बताते हुए कमलनाथ से इस्तीफा देने की मांग की है। प्रदेश को तालिबान प्रदेश बनाने के इन आरोपों पर तंज कसते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा का कहना है कि सच्चाई यह है कि धार की इस घटना में भी प्रमुख आरोपी भाजपा नेता ही है और उसे यह सच्चाई जान लेना चाहिए कि प्रदेश को तालिबानी प्रदेश कौन बना रहा है। अपने इस आरोप के समर्थन में उन्होंने शिवराज के साथ एक ही माला पहने हुए रमेश की फोटो भी जारी की है। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताते हुए इस बात पर जोर दिया है कि जिस प्रकार की घटिया राजनीति इस मामले में भाजपा नेता करना चाह रहे हैं वह शर्म का विषय है। उनका स्पष्ट आरोप है कि भाजपा नेता प्रदेश में अराजकता व हिंसा का वातारण निर्मित करने का सतत प्रयास कर रहे हैं किन्तु कमलनाथ सरकार की सख्ती के चलते उनके कारनामे कामयाब नहीं हो रहे हैं। भाजपा से आग्रह है कि खूब राजनीति करिए लेकिन कम से कम ऐसी राजनीति न करें जिससे प्रदेश की साख पर धब्बा लगे।
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पुलिस महानिदेशक वी.के. सिंह ने इस घटना के लिए भीड़ सहित पुलिस वालों को भी जिम्मेदार ठहराया है। भीड़ में शामिल लोग इस भयावह घटना का वीडियो बनाते रहे लेकिन किसी ने भी आक्रोशित लोगों को रोकने की कोशिश नहीं की। दोषी पाये जाने पर अन्य पुलिस कर्मियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। यह बात निश्‍चित तौर पर गौर करने लायक है कि आजकल लोग पीड़ित की मदद करने की बजाए वीडियो बनाने में व्यस्त हो जाते हैं, ऐसा करने वालों को इस मनोवृत्ति को छोड़ना चाहिए। सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए एसआईटी जांच कराने की घोषणा की, टीआई सहित पांच पुलिस वाले निलंबित किए गए। पैंतालीस लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई और पांच लोग गिरफ्तार किए गए हैं। धार जिला पुलिस अधीक्षक आदित्य प्रताप सिंह का कहना है कि दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है तथा 20 अन्य लोगों के चेहरों को भी चिन्हित किया गया है। भाजपा नेता सरपंच रमेश जूनापानी सहित पांच आरोपियों को न्यायालय ने जेल भेज दिया है। 
- अरुण पटेल
- लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं।
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