रेप केस में लड़की की 'सेक्स लाइफ' आरोपी की जमानत का आधार नहीं: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली।यौन हिंसा के खिलाफ लगातार सख्त रुख अपना रहे सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेप केस में लड़की की 'सेक्स लाइफ' की वजह से आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि अगर मेडिकल सबूत इस ओर इशारा दे रहे हों कि यौन हिंसा की पीड़ित 'सेक्स की आदी' है तब भी यह किसी हाई कोर्ट के लिए रेप आरोपी को जमानत देने का कोई आधार हरगिज नहीं हो सकता।
चीफ जस्टिस एस. ए. बोबडे, जस्टिस बी. आर. गवई और जस्टिस सूर्य कांत की बेंच ने रेप केस के एक आरोपी रिजवान को इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने पर सख्त रुख अपनाया। हाई कोर्ट ने इस आधार पर आरोपी को जमानत दे दी थी कि मेडिकल रिपोर्ट इस ओर इशारा कर रही थी कि पीड़ित 'सेक्स की आदी' थी और आरोपी का कोई आपराधिक रेकॉर्ड नहीं रहा है। हाई कोर्ट ने यह माना था कि हो सकता है कि आरोपी और पीड़ित के बीच सहमति से रिश्ता रहा हो।
सीजेआई की अगुआई वाली बेंच ने कहा, 'सेक्स की आदी होना जमानत देने का आधार नहीं है।' सुप्रीम कोर्ट ने 3 अप्रैल 2018 को आरोपी रिजवान को हाई कोर्ट से मिली जमानत को रद्द कर दिया। कोर्ट ने आरोपी को 4 हफ्ते के भीतर मुजफ्फरनगर कोर्ट में सरेंडर करने को कहा है।
लड़की के पिता की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 376 और पॉक्सो ऐक्ट के सेक्शन 3/4 के तहत FIR दर्ज की थी। लड़की का मेडिकल करने वाले डॉक्टर ने अपनी रिपोर्ट में उसकी उम्र 16 साल बताई थी। सीआरपीसी की धारा 164 के तहत मैजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराए गए अपने बयान में लड़की ने दावा किया कि रिजवान ने कट्टे की नोक पर उसके साथ रेप किया। लड़की ने अपने बयान में बताया कि जब उसने शोर मचाया तो उसके पिता मौके पर पहुंचे। उसके बाद उन्होंने FIR दर्ज कराई।
हाई कोर्ट में आरोपी की जमानत याचिका पर उसके वकील ने दलील दी कि मेडिकल रिपोर्ट से पता चलता है कि पीड़ित को कोई बाहरी या अंदरूनी चोट नहीं आई थी। इसके अलावा डॉक्टर की रिपोर्ट इस ओर भी इशारा कर रही है कि पीड़ित सेक्स की आदी थी। आरोपी के वकील ने दलील दी कि FIR इसलिए दर्ज हुई क्योंकि लड़की के पिता ने घटना को देख लिया। वकील ने यह भी दलील दी कि लड़की की उम्र 16 साल है लेकिन कानून के तहत 2 साल तक छूट दी जा सकती है यानी माना जा सकता है कि वह सहमति से सेक्स का अधिकार रखती है।
हाई कोर्ट ने आरोपी के वकील की दलीलों को मानते हुए अपने आदेश में कहा कि अपराध की प्रकृति और सबूतों के मद्देनजर इस केस में बेल दी जा सकती है। 3 अप्रैल 2018 को हाई कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी। आरोपी 8 दिसंबर 2017 से जेल में था और जमानत के बाद बाहर आ गया। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने रिजवान की जमानत को खारिज करने में 2 मिनट का भी वक्त नहीं लिया।