ढोंग और पाखण्ड छोड़कर किसानों को राहत दे कमलनाथ सरकारः गोपाल भार्गव

केंद्र का नाम लेकर किसानों को गुमराह कर रही प्रदेश सरकार : नरोत्तम मिश्रा
 

भोपाल। प्रदेश में किसान परेशान है। उसे खेती के लिए खाद, बीज और यूरिया तक नहीं मिल रहा है। मजबूर होकर किसान आत्महत्या कर रहा है। प्रदेश में अभी तक सैकड़ों किसान आत्महत्या कर चुके हैं, लेकिन सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। कमलनाथ सरकार हर मोर्चे पर विफल साबित हुई है। अपनी विफलता को छुपाने के लिए प्रदेश सरकार केन्द्र पर आरोप मढ़ रही है, लेकिन जनता कांग्रेस की हकीकत जानती है। भारतीय जनता पार्टी प्रदेश के परेशान किसानों की आवाज पूरी ताकत के साथ उठायेगी और सरकार को मजबूर करेगी। यह बात विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव एवं पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने सोमवार को प्रदेश कार्यालय में आयोजित पत्रकार-वार्ता में कही।
एक साल में किसानों को नहीं दी एक रूपए की सहायता
नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कहा कि प्रदेश सरकार केंद्र सरकार पर असहयोग करने का झूठा आरोप लगाती है, जबकि प्रदेश सरकार के पास एनडीआरएफ का 800 से 900 करोड़ रूपए पहले से बचा है और केंद्र सरकार ने भी एक हजार करोड़ रूपए किसानों की सहायता के लिए दिया है। कमलनाथ सरकार ढोंग और पाखण्ड छोड़कर यह बताए कि उसने अतिवृष्टि से प्रभावित कितने किसानों को, कितनी राहत राशि वितरित की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने 1 वर्ष में 33 हजार करोड़ रूपए विभिन्न योजनाओं और बोनस के रूप में किसानों को वितरित किए थे। गेहूं पर 200 रूपए प्रति क्विंटल के हिसाब से बोनस दिया गया था। बिजली और बीज पर सब्सिडी दी। कांग्रेस की सरकार को एक साल पूरा होने को है, लेकिन एक भी किसान को राहत के रूप में 1 रूपए भी नहीं मिला है।
सदन से सड़क तक उठाएंगे किसानों की आवाज
भार्गव ने कहा प्रदेश में चारों ओर हाहाकार है, जनता परेशान है, प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। किसानों को घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद यूरिया नहीं मिल पाता। पुलिस थानों से किसानों को खाद वितरित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने लगातार किसानों के दुख-दर्द को आवाज दी है। आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और विरोध के माध्यम से सोयी हुई सरकार को जगाने का काम किया है। उन्होंने कहा कि सरकार हर माह करोड़ों का ऋण ले रही है लेकिन विकास कार्य पूरी तरह ठप्प हैं। उन्होंने प्रश्न करते हुए मुख्यमंत्री से पूछा कि क्या जनता का पैसा विदेश यात्राओं, मंत्रियों के बंगलों की सजावट, ट्रांसफर उद्योग और 60 करोड़ रूपए कीमत वाला विमान खरीदने के लिए है ? उन्होंने कहा कि किसानों के कल्याण के लिए कांग्रेस ने अपने घोषणा-पत्र में जो वचन दिए थे उन्हें सरकार पूरा करे, अन्यथा भारतीय जनता पार्टी सड़क से लेकर सदन तक किसानों की आवाज बुलंद करेगी। भार्गव ने कहा कि आगामी शीतकालीन सत्र में सरकार को हम हर मोर्चे पर घेरेंगे। उन्होंने कांग्रेस द्वारा भाजपा सांसदों के घर पर किए गए प्रदर्शन पर कहा कि कांग्रेस ने नई परिपाटी शुरू की है। अब हम भी यही करने के लिए विवश हैं। सरकार ने किसानों के लिए क्या किया वह बताए और वचन पत्र के कितने वचन पूरे हुए हैं, जवाब दे। वरना भारतीय जनता पार्टी भी कांग्रेस सरकार के मंत्रियों के घरों का घेराव करेगी।
क्या कर्जमाफी के लिए ली थी केंद्र सरकार की सहमति
पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि जब भी कर्जमाफी की बात आती है तो कांग्रेस कहती है कि केन्द्र सरकार ने राशि नहीं दी। कांग्रेस के नेता बताएं क्या आपने कर्जमाफी की घोषणा केन्द्र सरकार से सहमति लेकर की थी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने एक साल में किसानों को 33 हजार करोड़ रूपए वितरित किए, लेकिन कभी भी केन्द्र से पैसा नहीं मांगा। आज कांग्रेस सरकार कोकाकोला को ब्याज माफ करती है, हवाई जहाज खरीदती है। विधान परिषद बनाने के लिए 100 करोड़ रूपए के खर्चे की बात करती है। मंत्रियों के बंगलों पर रंगरोगन और सजावट पर खर्च करती है, तब उसे केन्द्र सरकार की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन जैसे ही किसानों को राहत राशि देने की बात आती है तो सरकार किसानों को केन्द्र सरकार के नाम पर गुमराह करने का काम करती है।
कांग्रेसी भी बयां कर रहे सरकार की हकीकत
पूर्व मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस ने वचन पत्र में जो बातें कही थी,  उन्हें पूरा नहीं कर पायी है। यह बात विपक्ष के नाते हम ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के विधायक और नेता भी मानते हैं। कांग्रेस के महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया कहचुके हैं कि किसी भी किसान का 50 हजार तक का कर्जमाफ नहीं हुआ। वहीं, कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह ने सरकार की रेत टेंडर प्रथा को गलत बताया है। यह सरकार की हकीकत है जो धीरे धीरे जनता के सामने आ रही है। उन्होंने कहा कि कर्जमाफी की जब बात आयी तो प्रदेश सरकार ने नीले, पीले फार्म भरवाकर यह कहा कि इसमें सहकारिता के कर्मचारियों ने घोटाला किया है इसकी जांच करायेंगे। सरकार बताए कि उस जांच का क्या हुआ, उसमें कौन कौन दोषी पाए गए और उन पर क्या कार्यवाही हुई। उन्होंने कहा कि जब भी काम करने की बात होती है तो सरकार जांच का शिगूफा लेकर खड़ी हो जाती है। सरकार ने अभी तक कई मामलों में जांच करा ली लेकिन कुछ भी सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि जब अतिवृष्टि से फसल खराब हुई तो इनके मंत्री ने पटवारियों को भ्रष्ट कहकर उनकी हड़ताल करवाई, उसके बाद नायब तहसीलदारों की हड़ताल करवाई ताकि फसल का सर्वे न हो सके। आज सरकार की इन्हीं नीतियों के कारण अभी तक अतिवृष्टि से प्रभावित किसानों को मुआवजा राशि नहीं मिली है और वह खुद को ठगा महसूस कर रहा है।