दिल्ली चुनाव : आम आदमी पार्टी को शिकस्त देने के लिए बीजेपी कर रही है उसी के हथियार का इस्तेमाल

नई दिल्ली।दिल्ली चुनाव में बीजेपी अब आम आदमी पार्टी को शिकस्त देने के लिए उसी के हथियार का इस्तेमाल कर रही है। यह हथियार है- लोकलुभावन वादे। कल तक जो बीजेपी AAP पर 'मुफ्तवाद' और 'लोकप्रियतावाद' को बढ़ावा देने का आरोप लगा रही थी, अब खुद उसने भी अपने संकल्प पत्र में 'मुफ्त रेवड़ियों का वादा किया है। गरीबों को 2 रुपये किलो आटा, गरीब छात्राओं को मुफ्त इलेक्ट्रिक स्कूटी, मुफ्त साइकल जैसे वादों के जरिए बीजेपी को इस बार दिल्ली में कमल खिलने की उम्मीद है। आइए समझते हैं कि आखिर क्यों बीजेपी को इस बार लोकलुभावन वादों का सहारा लेना पड़ा और क्या 2 रुपये किलो आटा से दिल्ली में बीजेपी की दाल गलेगी?
2015 विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने बिजली के दाम आधा करने, मुफ्त बिजली, मुफ्त वाईफाई जैसे वादे किए थे। पार्टी को प्रचंड बहुमत भी मिला। इसके पीछे AAP के लोकलुभावन वादों की भी अहम भूमिका मानी गई। सरकार बनने पर केजरीवाल सरकार ने न सिर्फ अपने चुनावी वादों को धीरे-धीरे पूरा किया बल्कि कार्यकाल खत्म होते-होते महिलाओं को बसों में मुफ्त सफर की सौगात दी। पार्टी ने मेट्रो में भी महिलाओं के मुफ्त सफर की वकालत की है।
पूर्व क्रिकेटर से नेता बने और पूर्वी दिल्ली से बीजेपी सांसद गौतम गंभीर ने पिछले साल अक्टूबर में आम आदमी पार्टी पर हमला करते हुए कहा था कि वह मुफ्त देने में विश्वास नहीं करते। आज 3 महीने बाद उन्हीं की पार्टी अब उसी रास्ते पर चल रही है, जिसके लिए वह AAP और केजरीवाल को कोस रही थी। 2017 के एमसीडी इलेक्शन और 2019 के लोकसभा चुनाव के नतीजे बीजेपी का हौसला बढ़ाने वाले रहे हैं।
200 यूनिट तक मुफ्त बिजली, मुफ्त पानी, सरकारी अस्पतालों में मुफ्त इलाज जैसी योजनाओं के बावजूद आम आदमी पार्टी 2015 के बाद चुनावी इम्तिहानों में नाकाम रही। 2015 विधानसभा चुनाव में 70 में से 67 सीटें जीतने वाली पार्टी 2 साल बाद ही एमसीडी चुनावों में चारो खाने चित हो गई। 2019 के लोकसभा चुनाव में तो AAP दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से किसी भी सीट पर बढ़त नहीं बना पाई। लेकिन बीजेपी भी अच्छी तरह जानती है कि एक ही राज्य में अलग-अलग चुनावों में वोटिंग पैटर्न अलग-अलग रह सकता है। AAP वोटरों के बीच जोर-शोर से यह प्रचारित कर रही थी कि अगर बीजेपी सत्ता में आई तो उन्हें मुफ्त मिलने वाली सुविधाएं बंद कर दी जाएंगी। इसके जवाब में दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी कहते फिर रहे हैं कि बीजेपी लोगों की सुविधाओं पर केजरीवाल सरकार के मुकाबले 5 गुना ज्यादा सब्सिडी देगी। यही वजह है कि बीजेपी को भी लोकलुभावन वादों का सहारा लेना पड़ा।
2015 विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने विजन डॉक्युमेंट जारी किया था। 2013 में 30 प्रतिशत सस्ती बिजली का वादा करने वाली बीजेपी ने विजन डॉक्युमेंट में बिजली की दरों में कटौती के बारे में कुछ खास नहीं कहा था। सिर्फ इतना कहा गया था कि सरकार आई तो गरीब परिवारों को रियायती दर पर बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। हर घर को 24 घंटे बिजली, साफ पानी देंगे। 2015 विधानसभा चुनाव में दिल्ली को वर्ल्ड कैपिटल बनाने, झुग्गीवासियों को एक लाख पक्का मकान, सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य स्वास्थ्य बीमा, हर 5 किलोमीटर पर 15 बिस्तरों वाले अस्पताल, अनधिकृत कॉलोनियों के नियमतीकरण जैसे वादे किए थे।
लेकिन इस बार पार्टी के संकल्प पत्र में गरीबों को सिर्फ 2 रुपये प्रति किलो के हिसाब से अच्छी क्वॉलिटी का आटा, आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की पहली 2 लड़कियों को उनके 21 साल के होने पर 2 लाख रुपये की मदद, गरीब परिवार की कॉलेज जाने वाली छात्राओं को मुफ्त इलेक्ट्रिक स्कूटी और स्कूली छात्राओं को मुफ्त साइकल जैसे वादे हैं। इसके अलावा 5 साल में कम से कम 10 लाख बेरोजगारों को रोजगार देने का वादा किया गया है। बिजली के बारे में यह कहा गया है कि लटकते तारों को भूमिगत करने का काम तेजी और प्राथमिकता से किया जाएगा। पिछले दोनों चुनाव में बीजेपी के वादों को देखकर आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस बार AAP की काट के लिए उसने भी लोकलुभावन कार्ड खेला है।
बीजेपी सीएए विरोधी प्रदर्शनों पर आक्रामक है और वह शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन को मुद्दा बना रही है। पार्टी को उम्मीद है कि सीएए से उसे फायदा होगा। 2 रुपये किलो आटा, छात्राओं को मुफ्त स्कूटी, साइकल जैसे लोकलुभावन वादों का भी सहारा ले रही है। हालांकि, दिल्ली में बीजेपी के पास अरविंद केजरीवाल के मुकाबले कोई चेहरा नहीं है। पिछली बार किरण बेदी को चेहरा बनाने वाली बीजेपी ने इस बार सीएम कैंडिडेट घोषित नहीं किया है। बीजेपी की तरफ से खुद उसके 'चाणक्य' गृह मंत्री अमित शाह मोर्चा संभाले हुए हैं।
बीजेपी की कोशिश चुनाव को मोदी बनाम केजरीवाल की करने की है लेकिन AAP नेता अबतक सीधे-सीधे पीएम मोदी पर हमलावर नहीं है। केजरीवाल बदले-बदले से नजर आ रहे हैं और पीएम मोदी को कोसने वाले पाकिस्तान के मंत्री को ट्विटर पर नसीहत देते दिख रहे हैं। शाहीन बाग को लेकर जहां कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियां केंद्र पर हमलावर हैं वहीं AAP ने नरम रुख अपनाया है। केजरीवाल नहीं चाहते कि इस चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दे हावी हों। कहना बहुत मुश्किल है कि 2 रुपये किलो आटा से बीजेपी की दाल गलेगी या नहीं, लेकिन लोकलुभावन वादों की पिच पर उतरकर बीजेपी ने इरादे जरूर जाहिर कर दिए कि वह विरोधियों का मुकाबला उन्हीं के हथियार से करने को तैयार है।