पश्चिम बंगाल: असहिष्णुता, धार्मिक कट्टरता और नफरत...राज्यपाल ने बिना बदलाव पढ़ा भाषण

कोलकाता।पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य विधानसभा के बजट सत्र में अपने अभिभाषण के दौरान राज्य सरकार के तैयार किए गए भाषण को बिना किसी फेरबदल के पढ़ डाला। राज्यपाल ने ममता सरकार द्वारा तैयार भाषण को बिना असहमति जताए ही पढ़ा। उन्होंने कहा कि असहिष्णुता, धार्मिक कट्टरता और नफरत अब इस देश के नए मानक हो गए हैं। कुछ दिनों पहले केरल के राज्यपाल ने भी बिना बदलाव राज्य सरकार के भाषण को पढ़ा था, हालांकि उन्होंने इसे अपना मत नहीं करार देते हुए असमहति जताई थी।
राज्यपाल धनखड़ ने अपने भाषण में यह भी कहा कि 'सभी तरह की असहमतियों को अस्वीकार कर देना अब देशभक्ति के नाम पर नया फैशन' बन गया है। राज्यपाल ने राज्य सरकार के लिखे भाषण को ही पढ़कर सरकार के साथ किसी भी तरह के टकराव की संभावनाओं को भी समाप्त कर दिया। केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने राज्य विधानसभा में आखिरकार अपने अभिभाषण का वह विवादित पैरा भी पढ़ा, जिसमें नागरिकता संशोधन कानून को 'असंवैधानिक' और 'भेदभावपूर्ण' बताया गया था।
राज्यपाल ने कहा, 'वर्तमान में हमारा देश नाजुक समय से गुजर रहा है। हमारे संविधान के मूल्य और सिद्धांतों पर चुनौती मंडरा रही है। गलत सूचनाओं को फैलाना और देशभक्ति के नाम पर अहमतियों को अस्वीकार करना फैशन बन गया है। राज्य सरकार एनपीआर, एनआरसी, सीएए के जरिए लोगों में फूट डाले जाने के सख्त खिलाफ है।'
राज्यपाल ने कहा था कि बजट सत्र के दौरान वह राज्य सरकार के तैयार भाषण में कुछ बदलाव करेंगे। इस पर सत्तारूढ़ टीएमसी की तरफ से प्रतिक्रिया आई थी। हालांकि धनखड़ ने कहा कि वह संविधान के अनुसार ही काम करेंगे और 'लक्ष्मण रेखा' को नहीं लाघेंगे। बजट सत्र के दौरान टीएमसी विधायकों ने सीएए और एनआरसी के विरोध वाली टी-शर्ट और बैज पहन रखी थी। स्पीच के बाद राज्यपाल ने सीएम ममता बनर्जी और स्पीकर बिमन बंदोपाध्याय से मुलाकात भी की।
इससे पहले केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद ने पिछले महीने सदन में अभिभाषण के विवादित पैरा को पढ़ते हुए साफ किया था कि यह सरकार का पक्ष है। हालांकि, इसे पढ़ने से पहले उन्होंने यह साफ किया कि वह मानते हैं कि यह सरकार की नीतियों और योजनाओं के अंतर्गत नहीं आता है।