सौतेला व्यवहार: दिग्विजय के सियासी चक्रव्यूह में घिरेगी भाजपा?

मुख्यमंत्री कमलनाथ, राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यों तथा कांग्रेस नेताओं द्वारा अक्सर यह बात कही जाती है कि केन्द्र सरकार मध्यप्रदेश के साथ केंद्रीय सहायता देने के मामले में सौतेला व्यवहार कर रही है। किसानों की कर्जमाफी न होने और अन्य कुछ मुद्दों को लेकर भाजपा जहां सड़कों पर उतरी तो वहीं कांग्रेस ने तू डाल-डाल मैं पात-पात’’ की राजनीति करते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के द्वारा अतिवृष्टि को लेकर कोई भी सहायता राशि न देने तथा उसके हिस्से की धनराशि में कटौती करने का आरोप लगाते हुए बड़ी ही चतुराई के साथ जिन मुद्दों को लेकर भाजपा ने आंदोलन किया उन्हें उसके ही पाले में डालने की कोशिश की। अब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह ने मोर्चा संभाल लिया है और पहले प्रदेश के 39 सांसदों और बाद में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को पत्र लिखकर मोदी सरकार की घेराबंदी करने और प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए उनसे सहयोग की दरकार की है। दिग्विजय ने सभी सांसदों को पत्र लिखा है,यानी वे अपने इस अभियान में मोदी सरकार के चार मंत्रियों को भी शामिल होने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर तथा थावरचंद गेहलोत,स्वतंत्र प्रभार के राज्यमंत्री प्रहलाद सिंह पटेल तथा राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते शामिल है। भाजपा के अन्य प्रमुख नेताओं में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह प्रदेश उपाध्यक्ष प्रभात झा,पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान तथा प्रदेश महामंत्री बीडी शर्मा भी शामिल हैं। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने अपनी पार्टी के विधायकों को पत्र लिखकर यह जानने की कोशिश की है कि उन पर कोई आपराधिक मुकदमा चल रहा है या नहीं इसकी जानकारी सात दिन के भीतर दें। इन दो पत्रों ने प्रदेश के राजनीतिक फलक पर सियासी हल्कों में अचानक ही गर्माहट पैदा कर दी है। देखने की बात यही होगी कि दिग्विजय सिंह के सौतेले व्यवहार के सियासी चक्रव्यूह में भाजपा घिरती है या नही?
दिग्विजय सिंह के ताजा पत्र ने न केवल प्रदेश के भाजपा नेताओं व सांसदों को धर्मसंकट में डाल दिया है अपितु प्रधानमंत्री मोदी की घेराबंदी करने एक राजनीतिक हथियार के रुप में इसका उपयोग किया है। चूंकि मध्यप्रदेश में 29 में से 28 लोकसभा सदस्य भाजपा के हैं और उनका भी यह दायित्व बन जाता है कि प्रदेश के हितों की रक्षा करने के लिए आगे आयें और कांग्रेस के साथ न सही तो अलग से केन्द्र सरकार के सामने दस्तक दें। दिग्विजय सिंह ने भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री विधायक शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर उनसे आग्रह किया है कि वे प्रदेश की जनता के हित में थोड़ा वक्त निकालें तथा हम दोनों इस विषय में प्रधानमंत्री से चर्चा करें, वे आपकी (शिवराज) की बात नहीं टालेंगे। यदि फिर भी प्रधानमंत्री नहीं सुनते हैं तो प्रदेश के लोगों की खातिर हम दोनों ही दिल्ली चलकर प्रधानमंत्री निवास के सामने धरने पर बैठें।
दिग्विजय ने प्रदेश से निर्वाचित सभी 29 लोकसभा और 10 राज्यसभा सदस्यों को पत्र भेजते हुए उनसे इस मामले में सहयोग मांगा है और साथ ही यह भी कहा है कि प्रदेश की जनता के विश्‍वास व विवेक को राजनीतिक चश्मे से देखने का काम नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के लिए जनता ने कांग्रेस को जनादेश दिया है वहीं केंद्र सरकार बनाने के लिए भाजपा के 28 सांसद उसने लोकसभा में भेजे हैं इसलिए सभी सांसद दलगत राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश हित में केंद्र सरकार से मांग करने और मांग पूरी न होने पर विरोध प्रदर्शन में शामिल हों। दिग्विजय ने अपने पत्र में विभिन्न आंकड़ों का हवाला देते हुए यह रेखांकित करने की कोशिश की है कि केंद्र सरकार किस प्रकार से प्रदेश के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। शिवराज को सम्बोधित पत्र में उन्होंने लिखा है कि प्रदेश में इस वर्ष अत्याधिक बरसात हुई है अतिवृष्टि के कारण उत्पन्न हालातों से निपटने के लिए राज्य सरकार ने त्वरित कदम उठाये और प्रदेश के नागरिकों को राहत पहुंचाई, लेकिन मुझे यह कहते हुए अत्यन्त दुख हो रहा है कि प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए दी जाने वाली राशि में केंद्र सरकार ने अपना हिस्सा 90 प्रतिशत से घटाकर 75 प्रतिशत कर दिया है। केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न मदों में की गई कटौती या रोकी गयी राशि का विस्तार से हवाला देते हुए अन्त में दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि प्रदेश की सड़कों के निर्माण व उन्नयन के लिए सेंट्रल बोर्ड फंड के 498 करोड़ रुपये केन्द्र सरकार नहीं दे रही है। अतिवृष्टि से हुई क्षति के बारे में उन्होंने लिखा है कि केंद्र सरकार ने भेदभावपूर्ण नीति अपनाते हुए भाजपा शासित कर्नाटक एवं बिहार जैसे राज्यों को सहायता राशि प्रदान कर दी है जबकि मध्यप्रदेश को अभी तक मदद का इंतजार है। केंद्रीय अध्ययन दल ने क्षति के आंकलन के तहत राष्ट्रीय राहत कोष से 6621 करोड़ 28 लाख रुपये और अधोसंरचना पुर्ननिर्माण के लिए 22558 करोड 88 लाख रुपये की राशि तत्काल उपलब्ध कराने की अनुशंसा की है जो कि अभी तक नहीं प्राप्त हुई है।
गोपाल भार्गव ने भाजपा विधायकों को लिखी पाती
एक आपराधिक प्रकरण में भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी की विधानसभा सदस्यता विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति द्वारा निरस्त करने और इसकी अधिसूचना प्रकाशित होने के बाद अब भाजपा को अपने अन्य विधायकों की चिन्ता भी सता रही है कि कहीं कुछ और विधायक इस प्रकार के मामलों की चपेट में न आ जायें इसलिए भाजपा हाईकमान के निर्देश पर नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव अपनी पार्टी के विधायकों को एक पाती लिखकर उनसे पूछा है कि सांसदों व विधायकों के मामलों के लिए गठित भोपाल की विशेष अदालत में उन पर कोई आपराधिक या अन्य प्रकार का प्रकरण तो विचाराधीन नहीं है। अगर प्रकरण दर्ज है तो इसकी पूरी जानकारी और प्रकरण की वर्तमान स्थिति की जानकारी दें। एफआईआर की फोटोकापी और प्रकरण से संबंधित अन्य दस्तावेजों की फोटो कापी एक सप्ताह के भीतर भेजें। इतना ही नहीं अपितु भार्गव ने पार्टी विधायकों को केस लड़ने वाले वकीलों के नाम एवं मोबाइल नम्बरों की जानकारी मांगी है ताकि पार्टी वकीलों से संपर्क कर उनसे सीधे तौर पर भी जानकारी ले सके। इसके अलावा नेता प्रतिपक्ष ने दिसम्बर में विधानसभा का शीतकालीन सत्र के संबंध में कांग्रेस सरकार के 11 महीने के कार्यकाल की नाकामियों और अन्य मुद्दों को लेकर भी जानकारी मांगी है। भाजपा विधायक इस सत्र में जोरशोर से इन मुद्दों को उठाकर कमलनाथ सरकार की तगड़ी घेराबंदी करने की योजना बना रहे हैं। विधायकों से उनके क्षेत्र के संबंध में भी जानकारी मांगी गयी है।
और यह भी...
पवई के विधायक पद से 2 नवम्बर को विधायक पद से हटाये गये प्रहलाद लोधी को आरंभिक राहत मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय से मिल गयी है तथा न्यायालय ने 07 जनवरी 2020 तक दी गयी सजा पर स्थगन आदेश जारी कर दिया है। उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है और सियासी फिजा में तापमान ऊपर की ओर पहुंच रहा है। इस फैसले के बाद लोधी की विधानसभा सदस्यता दोबारा तत्काल बहाल होगी या नहीं इसको लेकर असमंजस की स्थिति बरकरार है। सदस्यता समाप्त करने वाले विधानसभा अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने यह कहकर मामले में एक नया पेंच डाल दिया है कि ऐसा ही एक फैसला पूर्व में तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष रहे ईश्‍वरदास रोहाणी ने भी लिया था, फिर भी हाईकोर्ट के फैसले की प्रमाणित प्रति मिलने और विधि विशेषज्ञों से चर्चा के बाद अगला कदम उठायेंगे। इसका मतलब साफ है कि विधायकी कब बहाल होगी इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं हैं, क्योंकि विधानसभा सीट रिक्त होने की अधिसूचना जारी हो चुकी है। लोधी की पैरवी करने वाले अधिवक्ताओं का दावा है कि उनकी विधायकी इस फैसले के बाद स्वमेव बहाल हो गयी है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने कहा है कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जायेंगे। इस प्रकार कुल मिलाकर लोधी की सदस्यता बहाली को लेकर असमंजस बना हुआ है।
- अरुण पटेल
- लेखक सुबह सवेरे के प्रबंध संपादक हैं।
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