मध्य प्रदेश : आरोपों के कोहरे ने ढंक लिए बुनियादी सवाल

मध्य प्रदेश में सत्ताधारी कांग्रेस और मुख्य प्रतिपक्षी दल भाजपा के बीच बीते साल से आरम्भ आरोप-प्रत्यारोपों का दौर नये साल में और तीखा एवं तल्ख होता जा रहा है, इससे कई बार ऐसा महसूस हुआ मानों शब्दों की मर्यादा तार-तार करने में कोई किसी से पीछे नहीं है। यदि भाजपा आरोपों का नहला जड़ती है तो कांग्रेस उसी तल्ख लहजे में जवाब देते हुए अपने आपको दहला सिद्ध करने में समूची ताकत झोंक देती है। चाहे माफिया के विरुद्ध अभियान हो या शराब दुकानों का मामला या फिर कोई अन्य मामला, अपने-अपने तरकश से आरोपों-प्रत्यारोपों के विष बुझे बाण दोनों पार्टियों द्वारा छोड़े जा रहे हैं। इन सबके बीच मूल मुद्दे से ध्यान भटकाना असली मकसद नजर आ रहा है और जनता की समस्याओं से जुड़े दैनंदिनी सवाल एवं बुनियादी समस्याओं से जुड़े जन-सरोकार एक प्रकार से इसके कोहरे में गुम होते जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भाजपा के लिए जमीनी आधार मजबूत करने का मोर्चा संभालने वाला है तो कांग्रेस सेवादल को नये बौद्धिक और जुबानी तीरों से लेस कर उसका मुकाबला करने के लिए कमर कसती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने राष्ट्रीय सेवादल के विषारद प्रशिक्षण शिविर में कहा है कि प्रदेश में सेवादल अकादमी और आईटी सेल बनाने में पूरा सहयोग दिया जायेगा ताकि यह संगठन गुमराह करने वाली राजनीति का मुकाबला करने में दक्ष एवं मजबूत बन सके। प्रदेश कांग्रेस कमेटी इसमें पूरा सहयोग देगी। गांव-गांव तक इसके नेटवर्क को सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता उन्होंने रेखांकित की। 
जहां तक आरोप-प्रत्यारोप का सवाल है सामान्यत: यह देखने में आया है कि किरदार एवं भूमिकाएं बदल जाती हैं लेकिन जो सत्ता में रहते अनुकूल नजर आता है वह प्रतिपक्ष की भूमिका में जाते ही प्रतिकूल व जनविरोधी नजर आने लगता है और विपक्ष में रहते जो निर्णय और रीति-नीति जनविरोधी एवं जनहित के प्रतिकूल नजर आती है उनमें से कुछ को सत्ता में आते ही अंगीकार करने में कोई विशेष परहेज नहीं रह जाता। सवाल यही है कि इन आरोप-प्रत्यारोपों के बीच जनता के बुनियादी सवालों को हल करने की ओर ध्यान कम जा पाता है, हालांकि मुख्यमंत्री कमलनाथ ने चुनाव के पूर्व जनता से जो वायदे किए थे उन्हें पूरा करने की दिशा में वे पूरी शिद्दत के साथ आगे बढ़ रहे हैं और उनका साफ कहना है कि उन्हें अपने अच्छे कार्यों एवं वचनों को पूरा करने का प्रमाणपत्र विपक्ष या किसी अन्य से लेने की दरकार नहीं है बल्कि ऐसा प्रमाणपत्र जनता से लेने की अपेक्षा रही है। विभिन्न माफियाओं के खिलाफ युद्ध का शंखनॉद कर प्रदेश को माफियामुक्त बनाने का जो अभियान राज्य  सरकार ने छेड़ा है उससे कमलनाथ की छवि में निखार आया है और लोग इस अभियान को पसंद भी कर रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री की यह भी जिम्मेदारी है कि वे इस बात पर सतत् निरागनी रखें कि यह अभियान कहीं मैदानी स्तर पर अपने मूल उद्देश्य से भटक न जाये और महज रस्म अदायगी या खानापूर्ति बनकर न रह जाये। 
सत्ताधारी दल की असली प्राथमिकता सरकार का राजस्व बढ़ाने की होती है जबकि विपक्षी दल जनता के बीच अपनी छवि निखारने की उहापोह में मशगूल रहता है। शायद यही वजह है कि जब दल सत्ता में रहता है तब वह जिन साधनों से राजस्व आय बढ़ाता है विपक्ष में आते ही उन्हीं का विरोध करने लगता है। डेढ़ दशक बाद सत्ता में आई कांग्रेस को विरासत में खाली खजाना मिला था और यह बात स्वयं तत्कालीन वित्त मंत्री जयन्त मलैया ने सरकार की बिदाई की बेला में स्वीकार की थी। दूसरे केन्द्र सरकार ने भी बहुत सी मदों में प्रदेश को मिलने वाली राशि में या तो कटौती कर दी है या अभी तक नहीं दी है, इसलिए अपना खाली खजाना भरने के लिए सरकार तेजी से प्रयास कर रही है। रेत खदानों की नीलामी से लगभग 1200 करोड़ रुपये राजस्व मिलने का इंतजाम सरकार कर चुकी है और अब आबकारी विभाग के माध्यम से राजस्व बढ़ाने की जुगत में सरकार लगी है। शराब की दुकानें खोलने के लिए बनाये गये नये स्लैब का विपक्षी दल भाजपा ने जमकर विरोध किया है और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने इसके विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। इनके आरोपों का विधि एवं जनसंपर्क मंत्री पी.सी. शर्मा और सामान्य प्रशासन एवं सहकारिता मंत्री गोविन्द सिंह ने तीखा विरोध करते हुए भाजपा शासनकाल की हकीकत बयॉ की है। स्वयं मुख्यमंत्री कमलनाथ मैदान में उतरे और उन्होंने शिवराज को पत्र लिखते हुए यह कहकर कि आपका दावा गलत है, आपने ही खोलीं शराब की नई दुकानें, इसलिए आपका दावा गलत है। शिवराज का आरोप था कि सरकार ने शराब माफिया को तोहफा दे दिया है और अब राज्य मदिरा प्रदेश बन जायेगा। शिवराज ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को पत्र लिखकर आबकारी नीति में बदलाव पर ऐतराज करते हुए कहा था कि शराब की दुकानें खोलने की अधिसूचना जारी कर शराब माफिया को नये साल का तोहफा दिया गया है। हमने तय किया था कि धीरे-धीरे शराब दुकानों को कम करेंगे। नई दुकानें खोलने से महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़ेंगे। उनका कहना था कि सरकार अपना फैसला बदले अन्यथा आंदोलन करेंगे। 
कमलनाथ ने शिवराज को लिखे पत्र में कहा कि आपके राज में शराब की नई दुकानें नहीं खुलीं यह दावा गलत है। 2003-2004 में देशी मदिरा की दुकानें 2221 थीं जो बढ़कर 2770 हो गयी हैं, इसी तरह विदेशी शराब की दुकानें भी 581 से बढ़कर 916 हो गयी थीं। भाजपा शासित राज्य उत्तरप्रदेश का हवाला देते हुए उन्होंने शिवराज के सामने यह भी स्पष्ट किया कि वहां एक लाख की आबादी पर बारह दुकानें हैं जबकि मध्यप्रदेश में महज पांच हैं। शिवराज के आरोप का हवाला देते हुए कमलनाथ ने कहा कि आपने लिखा कि नये आदेश से 2000 से 2500 नई दुकानें खुलेंगी, जबकि उप दुकान नई दुकान नहीं है इसलिए जनता में भ्रम फैलाने की बजाय आप प्रदेश के विकास में सहयोग दें। नीति में बदलाव अवैध व्यापार करने वाले शराब ठेकेदारों पर अंकुश लगायेगा। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने सरकार द्वारा फैसले को वापस नहीं लेने की स्थिति में मुख्यमंत्री निवास के सामने धरना देने की चेतावनी दी। भार्गव ने कहा कि कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में शराब मुक्त प्रदेश बनाने का वायदा किया था लेकिन अब वह वचनपत्र के विपरीत काम कर रही है। शराब यदि गांव-गांव में बिकेगी तो महिलाओं के साथ अपरोधों में भी वृद्धि हो जायेगी, हम ऐसी दुकानें नहीं चलने देंगे। सामान्य प्रशासन मंत्री डॉ. गोविन्द सिंह ने कहा है कि शिवराज भाषण न दें, शराब नीति प्रदेश में अच्छी बनी है, इससे शराब माफियाओं पर रोक लगेगी। यदि शिवराज शराबबंदी के हिमायती थे तो उन्होंने मुख्यमंत्री रहते शराबबंदी क्यों नहीं की। जनसंपर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने तो यहां तक कहा कि शिवराज एवं भाजपा को इस मुद्दे पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि उनके शासनकाल में शराब माफिया पूरे प्रदेश में फैला था, उन्हें बढ़ावा मिला था, अब तो प्रदेश में शुद्ध के लिए युद्ध चल रहा है। गुटका कंपनियों पर कार्रवाई की गयी है जबकि भाजपा सरकार अपने 15 साल के कार्यकाल में ऐसा नहीं कर सकी, अब माफियाओं का खात्मा कमलनाथ सरकार करके ही रहेगी। 
और यह भी...
मप्र कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेन्द्र सलूजा ने शिवराज पर तंज कसते हुए कहा है कि आबकारी नीति में परिवर्तन शराब माफियाओं के खिलाफ है लेकिन शिवराज सिंह चौहान उसका विरोध कर शराब माफियाओं के संरक्षक बनकर उसके पक्ष में खड़े हो रहे हैं। उन्होने आरोप लगाया कि शिवराज चाहते हैं कि शराब माफिया राज्य में खूब पनपे। सलूजा के अनुसार आबकारी नीति में जारी नई अधिसूचना सिर्फ अवैध शराब की तस्करी व बिक्री रोकने के लिए लाई गई है। अवैध शराब की बिक्री से होने वाले जनहानि और विवाद को रोकने के लिए ही यह प्रावधान किए गए है। अधिसूचना में स्पष्ट उल्लेख है कि जहां अवैध शराब की तस्करी की रिपोर्ट आएगी वहीं उपशराब दुकान खोलने की अनुमति दी जाएगी। यदि सलूजा शिवराज पर तंज कस रहे हैं तो प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह ने राज्य सरकार पर तंज कसते हुए कहा है कि कमलनाथ बुजुर्गों का राशन घर भेजने वाले थे लेकिन अब वे घर घर शराब परोसने मेंं लग गए हैं। कमलनाथ सरकार ने शराब दुकानों के बारे में जो निर्णय लिया है उससे हर मोहल्ले में शराब की दुकान खोलने का रास्ता साफ हो जाएगा। जहां तक इस मुद्दे पर आरोप प्रत्यारोपों का सवाल है वह अपनी जगह हैं लेकिन यदि सरकार वास्तव में अवैध शराब का बिक्रय रोकने के लिए प्रतिबध्द है तो उसे उस ओर भी ध्यान देना होगा जहां अनाधिकृत रेस्टोरेंट और अन्य स्थानों पर बिठाकर मदिरा परोसी जाती है।
- अरुण पटेल