मध्यप्रदेश : कमलनाथ के भक्तिभाव से भगवाई राजनीतिज्ञों में बेचैनी

मध्यप्रदेश में सत्ता की बागडोर संभालते ही जिस प्रकार से मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ द्वारा एक के बाद एक ऐसे मुद्दे जो हिन्दुओं की आस्था से जुड़े हैं और उनको प्रभावित करते हैं उन पर पूरी संजीदगी से अमल करने के कारण भगवाई राजनीतिज्ञों में बेचैनी साफ नजर आने लगी है। मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने राज्य सरकार द्वारा सनातन संस्कृति पर काम प्रारम्भ करने की तारीफ करते हुए कहा कि इस दिशा में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जिस तरह काम प्रारंभ किया है उसकी प्रशंसा की जाना चाहिए। एक ओर राज्यपाल ने जहां हनुमान चालीसा को कमलनाथ द्वारा विश्‍व स्तर पर प्रचारित करने को पसंद किया तो वहीं दूसरी ओर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह को यह बात नागवार गुजरी और उन्होंने एक बयान भी दे डाला। कुल मिलाकर कमलनाथ का भक्तिभाव और श्रद्धा जिस ढंग से सामने आ रही है उसके चलते यह भारतीय जनता पार्टी की भगवा राजनीति के नहले पर दहला पड़ता नजर आ रहा है और शायद यही कारण है कि भाजपा में अब इसको लेकर कुछ बेचैनी नजर आने लगी है।
टंडन ने राजभवन में मीडिया से अनौपचारिक चर्चा करते हुए एक सवाल के उत्तर में कहा कि राम को पहले विवादित बनाया जाता था, राम थे या नहीं, इस पर बात होती थी, किन्तु अब ऐसा नहीं है। कमलनाथ ने श्रीलंका में सीता माता मंदिर, चित्रकूट का विकास, ‘राम वन गमन पथ’ का विकास और हनुमान चालीसा को विश्‍व स्तर पर प्रचारित किया है। एक ओर जहां उन्होंने कमलनाथ की इस कार्यशैली को पसंद किया तो वहीं दूसरी ओर इशारों ही इशारों में यह कहते हुए चेताया भी कि नागरिकता संशोधन कानून का विरोध हो लेकिन संविधान की लक्ष्मण रेखा की मर्यादा के भीतर। यदि मर्यादा से हटकर काम होगा तो संविधान ने मुझे भी कुछ अधिकार दिए हैं, यदि कोई कानून अथवा संशोधन संसद में दो तिहाई बहुमत से पास हो गया है तो उसे स्वीकार करना राज्यों की बाध्यता है। उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि राज्य में किस दल की सरकार है इससे मुझे मतलब नहीं। सरकार ठीक से काम करे इसमें मेरा सहयोग रहेगा। इस प्रकार राज्यपाल ने एक चतुर राजनीतिज्ञ होने का परिचय देते हुए सरकार को इशारों-इशारों में ही बहुत कुछ समझा दिया और यह भी दर्शाने में हिचक नहीं की कि सरकार के जो अच्छे कदम होंगे उनकी वे प्रशंसा भी करेंगे।
जहां तक कमलनाथ का सवाल है वे स्वयं खुद बड़े हनुमान भक्त हैं। अस्सी के दशक में उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र छिंदवाड़ा जो कि अब उनका विधानसभा क्षेत्र भी है से पन्द्रह किमी दूर सिमरिया में 101 फीट ऊंची हनुमान प्रतिमा की स्थापना कराई वहीं इंदौर के पास सनवदिया में राम मंदिर के निर्माण का काम आरंभ हो गया है। एक करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस मंदिर में स्थानीय लोगों के अलावा सरकार का आध्यात्म विभाग भी सहयोग करेगा। कमलनाथ ने गांधी पुण्यतिथि के मौके पर हनुमान चालीसा का सवा करोड़ बार जाप का आयोजन करने के बाद उसके दूसरे दिन अनूपपुर जिले के अमरकंटक में नर्मदा महोत्सव में शिरकत कर धर्मप्रेमी जनता का एक प्रकार से मन मोह लेने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी। इस मौके पर उन्होंने अपनी सरकार के नजरिए को रेखांकित करते हुए कहा कि दिल जोड़ने की संस्कृति को समृद्ध बनाने के साथ ही नई सोच और व्यवस्था में परिवर्तन कर हम मध्यप्रदेश को नई पहचान देंगे। आने वाले समय में हमारे प्रदेश की तुलना पिछड़े नहीं देश के अग्रणी राज्यों में होगी। देश के हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश में विभिन्न संस्कृतियों का समावेश है, मालवा, निमाड़, महाकौशल, विध्य क्षेत्र की अलग-अलग संस्कृतियों में आपसी सद्भाव, भाईचारा और प्रेम की भावना मजबूत है और यही विशेषता हमारे देश की भी है। भारतीय संस्कृति एक ऐसी संस्कृति है जो सबको समेट कर एक झंडे की नीचे लाकर खड़ा करती है, यही भारत की महानता है जिसे विश्‍व आश्‍चर्य की नजर से देखता है, हमें इसी संस्कृति को और अधिक मजबूत बनाना है तथा इसे कमजोर करने वाली ताकतों को नाकामयाब करना है। पहली बार अमरकंटक में हुए नर्मदा महोत्सव को निरन्तर आगे भी जारी रखा जाएगा और इसे एक पर्यटन स्थल के रुप में विकसित किया जायेगा, इससे पूरे क्षेत्र के जनजीवन में बदलाव आयेगा और लोगों को यहां रोजगार भी मिलेगा। इस महोत्सव में पूरे विधि-विधान से आस्था व श्रद्धा के साथ नर्मदा परिक्रमा करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी मौजूद थे।
विशेषकर श्रीलंका में सीता मंदिर और ‘राम वन गमन पथ’ के काम को जिस गंभीरता से कमलनाथ ने हाथों में लिया है उससे एक तीर से दो निशाने साधे गए हैं। पहला तो उन्होंने अपनी सरकार की आस्था प्रदर्शित की है और दूसरी ओर यह बात भी साफ हो गयी कि तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में बनी इन दोनों योजनाओं पर कोई विशेष काम नहीं हो पाया था, जबकि मूलत: यह उनकी ही परिकल्पना थी। ‘राम वन गमन पथ’ को चिन्हित करने का काम और किस प्रकार इसका विकास होगा इसकी कार्ययोजना तत्कालीन संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकान्त शर्मा के कार्यकाल में बनी थी, लेकिन बाद में इस पर कोई खास काम आगे नहीं हो पाया। 2010 में श्रीलंका में सीता माता मंदिर बनाने के प्रयास हुए थे और इस पर 14 करोड़ रुपये खर्च करना अनुमानित था, 2013 में बेंगलूरु की एक कम्पनी से इसका डिजायन तैयार कराया गया लेकिन इसके बाद इस पर अमल नहीं हो पाया। मुख्यमंत्री कमलनाथ की महाबोधि सोसायटी के अध्यक्ष बनागला उपतिसा के साथ हुई मुलाकात के बाद इसका मार्ग प्रशस्त हुआ और सरकार ने इसके लिए फंड देने का ऐलान करते हुए कहा कि मार्च तक धन उपलब्ध करा दिया जायेगा और अतिशीघ्र मंदिर की डिजायन को अंतिम रुप दिया जायेगा। मंदिर निर्माण के लिए मध्यप्रदेश व श्रीलंका के अधिकारियों की एक समिति बनाई जायेगी जिसमें महाबोधि सोसायटी के सदस्य भी शामिल होंगे। यह समिति निर्माण कार्य की निगरानी करेगी। उदार हिन्दुत्व की दिशा में आगे बढ़ रही कांग्रेस सरकार ने ‘राम वन गमन पथ’का अपना चुनावी घोषणापत्र का वचन पूरा करने के लिए एक नया फार्मूला ईजाद कर लिया है, इसके लिए ट्रस्ट का गठन किया जायेगा। इस पथ के दोनों सिरों से एकसाथ निर्माण कार्य आरंभ होगा। पहले चरण में दोनों ओर से तीस-तीस किमी का निर्माण होगा। इस संबंध में एक समीक्षा बैठक में कमलनाथ ने कहा कि इसके निर्माण के लिए 22 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और अगले वर्ष भी राशि का पर्याप्त प्रावधान किया जायेगा। जनसंपर्क, विधि विधायी कार्य व अध्यात्म मंत्री पी.सी. शर्मा ने पूरे प्रोजेक्ट की रिपोर्ट सामने रखी। ट्रस्ट में साधु-संतों व जनप्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। भगवान राम के प्रति आस्था रखने वालों से आर्थिक सहयोग भी लिया जायेगा।
और यह भी...
गांधीजी की पुण्य तिथि पर पंडित विजय शंकर मेहता की उपस्थिति में आयोजित हमारे हनुमान सांस्कृतिक मंच भोपाल द्वारा हनुमान चालीसा के सवा करोड़ जप कार्यक्रम से प्रदेश के सियासी जगत में हलचल मचना स्वाभाविक था। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह का कहना है कि किसी भी धार्मिक आयोजन से कोई तकलीफ नहीं है लेकिन कांग्रेस के यही लोग सुप्रीम कोर्ट में भगवान राम को काल्पनिक बताते हैं, अगर यही हनुमान चालीसा का पाठ करने लगें तो आश्‍चर्य होता है। कांग्रेस के ये नेता एक तरफ अल्पसंख्यकों को भड़काते हैं तो दूसरी तरफ हनुमान चालीसा जैसे आयोजनों से बहुसंख्यक लोगों को साधने की कोशिश करते हैं। कमलनाथ और राकेश सिंह के बीच इसको लेकर वार और पलटवार भी हुआ। कमलनाथ ने पलटवार करते हुए राकेश सिंह के बारे में कहा कि उनका मुंह पहले चलता है और दिमाग बाद में चलता है। हम मंदिर जाते हैं, धार्मिक आस्थाओं पर बात करते हैं तो भाजपा नेताओं के पेट में दर्द क्यों होता है, क्या उन्होंने धर्म की एजेंसी ले रखी है या ठेकेदार हो गए हैं। हम धर्म को राजनीति से नहीं जोड़ते जबकि वे धर्म के नाम पर राजनीति करते हैं।  राकेश सिंह ने प्रत्युत्तर देते हुए कहा कि मैं आभारी हूं आपका, आपने माना कि पहले मेरी जुबान चलती है और बाद में मेरा मस्तिष्क चलता है, लेकिन मैं कहना चाहूंगा कि प्रदेश की जनता कह रही है कि कमलनाथजी आपकी केवल जुबान चलती है, अगर दिमाग चलता तो कर्जमाफी व बेरोजगारी भत्ता देने का झूठ नहीं बोलते।
- अरुण पटेल