मध्यप्रदेश : दिग्गी ने दबाई दुखती रग, पीसी ने पकड़ी नब्ज

देश तीन तलाक, धारा 370 और विश्वव्यापी मंदी की खबरों के बीच पाक की युद्ध धमकियों को देखने सुनने में व्यस्त है। ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा पर आईएसआई के लिए मुखबरी करने का आरोप लगाकर सियासी बाजार में मिर्ची का तड़का लगा दिया है। अब इसे लेकर भाजपा और बजरंग दल एकाध हफ्ते हल्ला मचाते रहेंगे। इसी बीच प्रदेश के विधि मंत्री पी.सी.शर्मा ने भारी भरकम जुर्माने के साथ एक सितम्बर से लागू हुए नए मोटर व्हीकल एक्ट को नामंजूर कर दिया है। दिग्गी राजा के बयान पर जरूर विवाद होगा मगर पीसी के कदम से कांग्रेस सरकार को नियम कायदे और टैक्स के दबाव में सेंडविच बन रहे निम्न और मध्यमवर्गीय वर्ग की सहानुभूति जरूर मिलेगी। जनता गलती करे तो जुर्माना और नगर निगम के साथ सरकारी एजेंसी सड़कों का रखरखाव नहीं करे और फिर दुर्घटना हो तो उसका जुर्माना किस पर लगाया जाये। ऐसे में सरकारी नियम एकतरफा लगते हैं सिर्फ जनता का गला दबाने वाले। बेशक कठोर नियमों लेकिन सरकारी विभाग भी उसके दायरे में आये।
जनता से जुड़े मुद्दों पर अक्सर सरकार की बखिया उधेड़ने वाले केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी भी इन दिनों खासे सुर्खियों में हैं। वजह है उनका नागपुर में दिया गया वह बयान – सरकार जहां हाथ लगाती है वहां सत्यानाश हो जाता है। एक बार उन्होंने रेलवे ओवरब्रिज बनाने पर रेल मंत्रालय की अनुमति अक्सर देर से मिलने पर कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर छह महीने के भीतर लंबित फाइलों का निराकरण नहीं हुआ तो वे अफसरों को बिल्डिंग से नीचे फेंक देंगे। इसके बाद करीब तीन महीने के भीतर साढ़े तीन सौ में लगभग तीन सौ को हरी झंडी मिल गई थी। बीते हफ्ते के आखिर में इन तीन नेताओं के बयानों ने हंगामा भी बरपाया और वाहवाही भी लूटी। सियासत में एक साथ ऐसे मौके कम ही आते हैं।
पहले विवाद पर बात करते हैं। ये इत्तेफाक है कि भोपाल की सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने जब भी मुंह खोला अक्सर हंगामा ही हुआ। उनके ढेरों बयानों के बीच में नमूने के तौर पर पिछले दिनों यह कहना कि भाजपा नेताओं को नुकसान पहुंचाने के लिए विरोधी मारक तंत्र मंत्र का प्रयोग कर रहे हैं। भाजपा के दो बड़े नेताओं के असामयिक अवसान के कारण शोकसभा में सांसद प्रज्ञा ने मारक मंत्र की बात की थी। सबको पता है चुनाव के दौरान उन्होंने कहा था कि उनके श्राप से महाराष्ट्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे की मृत्यु हुई थी। चर्चाओं में बनी रहने वाली प्रज्ञा ने जिन दिग्विजय सिंह को चुनाव हराया समानता देखिए श्री सिंह भी अक्सर अपने बयानों के वजह से ही विवादों में बने रहते हैं। यह अलग बात है कि दिग्गी राजा के बयान राजनीतिक पृष्ठभूमि में भले ही भाजपा संघ को चोट पहुंचाते हों मगर तर्क और तथ्य के साथ बयान पर अड़े रहने की उनकी जिद उन्हें बाकी नेताओं से अलग करती है। भिण्ड की एक सभा में उन्होंने कहा कि बजरंग दल व भाजपा के आईटी सेल के पदाधिकारी पैसे लेकर आईएसआई और पाकिस्तान के लिए जासूसी करते हुए प्रदेश की पुलिस द्वारा पकड़े गए हैं। विरोध और बजरंग दल की इस चेतावनी पर कि वे दिग्गी राजा को इस मुद्दे पर कोर्ट में ले जाएंगे। श्री सिंह कहते हैं कि मैं अपने बयान पर आज भी कायम हूं। इसके पहले भी उन्होंने संघ बम बनाना सिखाता है जैसे चर्चित बयान दिए थे।उनके इस बयान को कुछ लोग भाजपा के समर्थन में भी मानते हैं। असल में मंदी के चलते पूरे देश में मोदी सरकार को घेरा जा रहा है तब दिग्गी राजा का ये बयान कुछ दिनों के लिए सरकार को राहत दे सकता है क्योंकि अब लोगों का रुख मंदी से हटेगा और दिग्विजय के बयान पर टिकेगा।
इसके अलावा दिग्विजय सिंह के शिष्य माने जाने वाले विधि मंत्री पीसी शर्मा ने नए मोटर व्हीकल एक्ट को फिलहाल मध्यप्रदेश में लागू करने से इंकार कर दिया है। उनका कहना है कि बगैर प्रचार इतना भारी जुर्माना लगाना आम आदमी के हित में नहीं हो सकता है।उन्होंने कहा है हम केन्द्र सरकार से इस पर विचार के लिए आग्रह करेंगे। केन्द्र के नए नियम के अनुसार बिना हैलमेट एक हजार रुपए तीन सवारी पर पांच सौ,बिना लायसेंस पांच हजार,तेज गति दो हजार,खतरनाक ड्राईविंग पांच हजार,ड्राईविंग के समय फोन पांच हजार और नशे में ड्राईविंग करते पकड़े जाने पर दस हजार रुपए जुर्माना देना पड़ेगा। फिलहाल प्रदेश में इसे रोक दिया गया है। ये कब तक रुकेगा इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन पीसी ने कम प्रचार की आड़ में कुछ दिनों के लिए ही सही रोक कर जनता का दिल जीत लिया है। इसे कहते हैं सरकार में रहकर सियासत की नब्ज पकड़ना। असल में एम.ए.सीटी अब एमएनआईटी भोपाल से इंजीनियरिंग किए हुए पीसी पालिटिक्स में सोशल इंजीनियरिंग करते भी नजर आ रहे हैं। पीसी ने अपनी सियासत की शुरुआत तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की सरपरस्ती में झुग्गी झोपड़ी संघ के नेता के रूप में की थी। शायद इसलिए उन्हें जुर्माने की ये रकम आम जनता के लिहाज से भारी लगी।
सिंधिया पीसीसी चीफ नहीं बने तो....
मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सियासत भारी बारिश के बावजूद नए पीसीसी चीफ के मुद्दे पर तप रही है। संगठन और सरकार का तबा इतना गरम है कि दिग्विजय सिंह से लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया के नाम के छींटे मारो तो छनाछन की आवाज आ रही है। विवादों के बीच सबको संभालने और समझने वालों में वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह का नाम अध्यक्ष के लिए आता है। इसी बीच सिंधिया समर्थक स्वर्गीय माधव राव सिंधिया से लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया तक प्रदेश कांग्रेस की कमान से दूर रखने के लिए दिग्गी राजा को ही निशाने पर लेते हैं। एक जमाने में अर्जुन सिंह के बाद माधवराव को मुख्यमंत्री बनाने लगभग तय हो गया था लेकिन अर्जुन की चाणक्य बुद्धि के चलते उनकी जगह मोतीलाल वोरा की ताजपोशी हो गई थी। इसके बाद पिछले साल ज्योतिरादित्य सिंधिया मुख्यमंत्री पद की दौड़ में थे और कमान मिल गई कमलनाथ को। अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के मामले में भी अगर सिंधिया की अनदेखी होती है तो अल्पमत की नाथ सरकार बगावत के चलते अनाथ भी हो सकती है। असल में पहले पिता और अब उनके साथ लगातार प्रदेश नेतृत्व के मुद्दे पर नाइंसाफी ज्योतिरादित्य कैंप सहन करने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में संभव है बगावत हुई तो जिस तरह डीपी मिश्र की कांग्रेस सरकार को सिंधिया की दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने गिराया था मुमकिन है राजनीति बगावत के उसी मुहाने पर खड़ी दिखाई दे। सब लोग दम साधे कांग्रेस में नए अध्यक्ष की ताजपोशी और उसके बाद के हालात की प्रतीक्षा में हैं।
राघवेंद्र सिंह