अमेरिका ने न्यूक्लियर डील की बैठक में शामिल होने पर हामी भरी, ईरान से सीधे वार्ता के विकल्प खुले

वॉशिंगटन। अमेरिका ने शुक्रवार को इस बात की पुष्टि की है कि वह अगले सप्‍ताह विएना में होने वाली न्यूक्लियर डील की बैठक में शामिल होगा. अमेरिका ने इस बैठक में सीधे ईरान के साथ बात करने का प्रस्‍ताव किया है. इससे ईरान के साथ सीधी वार्ता के विकल्‍प खुल गए हैं.अमेरिका के विदेश विभाग के प्रवक्‍ता नेड प्राइस ने कहा, 'यह अभी शुरुआत ही है, ऐसे में हम किसी भी तत्‍काल साफ अनुमान नहीं लगा सकते क्‍योंकि आगे मुश्किलों से भरी बातचीत होगी लेकिन हमारा मानना है कि यह सही दिशा में बढ़ाया गया कदम है.'  उन्‍होंने कहा, 'हम इस समय यह अनुमान नहीं लगा सकते कि क्‍या इस प्रक्रिया के जरिये अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत होगी लेकिन अमेरिका ने इस बारे में विकल्‍प खुला रखा है.'
यूरोपीय यूनियन ने शुक्रवार को 2015 की न्‍यूक्लियर डील के लिए विएना में सभी पक्षों की बैठक की घोषणा की थी, इसे औपचारिक तौर पर Joint Comprehensive Plan of Action के नाम से जाना जाता है लेकिन अमेरिका के पूर्व राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप इससे हट गए थे.गौरतलब है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के दौरान अमेरिका 2018 में समझौते से बाहर हो गया था लेकिन जो बाइडेन जब राष्ट्रपति बने तो उन्होंने समझौते में फिर से शामिल होने की सहमति जताई थी.
इससे पहले, ईरान और वैश्विक ताकतों ने कहा था कि न्‍यूक्लियर डील (परमाणु समझौते) में अमेरिका के लौटने का वे स्वागत करने को तैयार हैं. डिजिटल तरीके से आयोजित बैठक के बाद जारी एक बयान के मुताबिक, यूरोपीय संघ, चीन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, ब्रिटेन और ईरान वाले समूह के अध्यक्ष ने कहा है कि भागीदार परमाणु समझौता को बरकरार रखने को लेकर प्रतिबद्ध हैं और इसके पूर्ण तथा प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के तौर-तरीकों पर चर्चा की गई. समूह ने कहा था कि वे पाबंदी हटाए जाने को चिह्नित करने और परमाणु क्रियान्वयन कदमों को लेकर 2015 के समझौते पर वियना में अगले सप्ताह आगे की वार्ता करेंगे.  बयान में कहा गया कि समूह के समन्वयक परमाणु समझौता के सभी भागीदारों और अमेरिका के साथ वियना में अलग से संपर्क के लिए प्रयास तेज करेंगे.
उधर, तेहरान में सरकारी टेलीविजन ने ईरान के परमाणु वार्ताकार अब्बास अरघची के हवाले से बताया कि शुक्रवार को डिजिटल बैठक में उन्होंने कहा कि परमाणु समझौते में अमेरिका के लौटने के लिए किसी वार्ता की जरूरत नहीं है और रास्ता बिल्कुल साफ है. अरघची ने कहा, ‘‘अमेरिका समझौते में लौट सकता है और जिस तरह वह समझौते से बाहर हुआ तथा ईरान पर अवैध पाबंदियां लगायी गयीं उसे वह खत्म कर सकता है.''