आईफा- मध्यप्रदेश में नीरो बजा रहे हैं बंशी..!

इंटरनेशनल इंडियन फिल्म एकेडमी “आईफा” के आयोजन से मध्यप्रदेश मार्च के महीने में देशभर के रजत पट के चौंधियाते किरदारों से सुनहरा हो जाएगा। तीन दिन के आईफा समारोह में करीब 700 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। लगभग एक लाख 90 हजार करोड़ के कर्ज से दिवालिया हो रहे सूबे के लिए यह रकम गरीबी में गीला आटा होने जैसी है। मगर जब राजा तय कर ले तो उसके लिए करोड़ों का इंतजाम करना कौंड़ियों के बराबर होता है। इस बार राज्य सरकार का बजट कुल कर्ज की रकम से पच्चीस- पचास हजार करोड़ ज्यादा होने का अनुमान है। अलग बात है कि इस इंतजाम में समारोह के सहभागी बन रहे राज्य पर्यटन विकास निगम की कमर टूट जाएगी, क्योंकि 35 करोड़ रुपए उसकी जेब से भी निकाले जाएंगे।फिर पर्यटन की प्रॉपटी बिकने के प्लान बनने लगे तो हैरत नही होगी। आसमानी उम्मीद ये है कि बदहाली में डूबे इस सूबे के लिए आईफा पूंजी निवेश का जरिया भी हो सकता है। मुख्यमंत्री कमलनाथ इसी आशा के चलते यह रंगीन जोखिम उठा रहे हैं।
दस दिन में किसानों का कर्ज माफ करने के सुल्तानी वादे पर सवार कांग्रेस गरीब गुरवों और किसानों के चेहरा बने शिवराज सिंह को मात देकर एक साल पहले सत्ता में आई। अभी तक किसानों का कर्जा पूरा माफ नहीं हुआ है। और इसके नहीं होने पर बकौल राहुल गांधी " किसानों का दस दिन में कर्ज माफ नही तो सीएम साफ" कर देंगे जैसा कुछ नहीं हुआ है। तंग हाल मध्यप्रदेश के किसानों का दो लाख तक का कर्ज माफ करने के लिए पॉलिटिक्स में कार्पोरेट कल्चर के लीडर कमलनाथ का आईफा एक बड़ा दांव हो सकता है। मान्यता है कि जहां भी आईफा होता है वहां लक्ष्मी की कृपा होती है। मतलब उद्योग के लिए निवेश आएगा, बेरोजगारों के लिए रोजगार लाएगा। अभी तो वेतन बांटने और विकास कार्यों के भुगतान के लिए सरकार का हाथ तंग है। किसान,युवा बदहाल हैं। स्कूल और अस्पतालों की हालत ठीक नहीं है। ऐसे में फिल्मी सितारों का इंदौर,भोपाल में प्रदर्शन करना भूखे पेट लोगों को बहलाने की तरह हो सकता है। इसमें अच्छी बात ये है कि इस पूरे तमाशे में कहीं न कहीं राज्य के हित को देखा जा रहा है। 27 से 29 मार्च तक तीन दिन चलने वाले इस जलसे के बाद मध्यप्रदेश में फिल्मों के निर्माण के लिए शूटिंग का दौर शुरू हो सकता है। इससे स्थानीय कलाकार को पर्दे पर दिखने का अवसर मिलेगा। होटल से लेकर चाय वाले और खत्म होते तांगे व आटो रिक्शा वालों को भी रोजगार मिलेगा। परेशान लोगों का दिल हीरो हीरोईन की आवाजाही से बहलने के भी नए नए रास्ते निकलेंगे। जारशाही की एक कहानी याद आ रही है- राजा जब अपनी प्रजा से मिलने के लिए देशाटन करते थे तब हुक्मरान उनके रास्ते के दोनों किनारों पर पेड़ पौधे लगाते थे। गरीबी छिपाने के लिए सड़क के दोनों तरफ कनातें तान दी जाती थीं।गरीब रियाया और उनके बच्चों को नए - नए वस्त्र पहनाकर राजा के स्वागत में खड़ा कर दिया जाता था। इससे राजा को लगता था सब प्रसन्न हैं और चौतरफा खुशहाली है। राजा का दौरा खत्म होते ही नए वस्त्र वापस ले लिए जाते थे। बदहाली छिपाने वाली कनातें भी सड़कों से हटा दी जाती थीं। कमोवेश आईफा को हम इसी संदर्भ में देख सकते हैं। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी चुनाव पूर्व नर्मदा जी को बचाने अवैध रेत खनन रोकने, उनके किनारे पौधे लगाने नमामि देवी नर्मदे यात्रा पर करोड़ो रूपये खर्च कर चुके हैं। कुछ ऐसी ही व्यवस्था अहमदाबाद में भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस्तकबाल में की जा रही है। इससे साफ लगता है सत्ता किसी की भी हो और कहीं भी हो ज्यादातर सबका चरित्र लगभग एक जैसा ही होता है।
आईफा के आयोजन से जलसा पसंद लोगों के लिए फरवरी से मार्च तक मजे के दिन हो सकते हैं। लेकिन प्रदेश की परेशान जनता के लिए ये कोतूहल की तरह होगा। हालांकि दुनियाभर में आईफा का सफर सन 2000 से लंदन से शुरू हुआ था। अफ्रीका,चीन,सिंगापुर,मलेशिया,दुनिया,बैंकाक,श्रीलंका,कनाडा होते हुए मुम्बई से मध्यप्रदेश आ गया है।पिछला आईफा मुम्बई में हुआ था और उसमें 1971 के भारत पाक युद्ध पर बनी फिल्म राजी की नायिका आलिया भट्ट को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के अवार्ड से नवाजा गया था। रणवीर सिंह को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का अवार्ड दिया गया था। महानायक अमिताभ बच्चन से लेकर फिल्मी दुनिया के छोटे बड़े किरदार भोपाल इंदौर पहुंचेंगे। जाहिर है कि सारे होटल टैक्सी कारें बुक रहेंगी। हो सकता है आम लोगों के रुकने के लिए न तो होटल मिले और घूमने के लिए टैक्सी। इन दिनों ओला ऊबर जैसी टैक्सी सेवा की खूब चांदी कट सकती है। अफसरों और नेताओं के भी मजे होंगे। ईवेंट मैनेजरों और संस्थाओं के लिए तो यह 700 करोड़ का आयोजन पांचों उंगलियां घी और सिर कढ़ाई में जैसा साबित होगा। पूरे खेल में राज्य पर्यटन विकास निगम पर सबसे ज्यादा आर्थिक बोझ आएगा। क्योंकि इस पूरे आयोजन में पर्यटन महकमें के साथ मुम्बई की विजक्राफ्ट कंपनी की सहभागिता है।एमडी और फिर सीएमडी बने अश्विन लोहानी जैसे अफसर ने राज्य पर्यटन विकास निगम की आर्थिक हालत मजबूत की थी और होटल,रेस्तरां को बिकने से बचा लिया था। एक तरह से लोहानी निगम और राज्य के पर्यटन स्थलों के भाग्यविधाता बनकर उभरे थे। अब आईफा में 35 करोड़ निगम के खाते से जाने वाले हैं। साथ ही भोपाल की बड़ी झील में एक और आयोजन होगा जिसमें पर्यटन निगम की जेब से 8 करोड़ की मोटी रकम निकाली जाएगी। ये दोनों खर्च निगम की हालत पतली किए बिना नहीं रहेंगे। आईफा तो हो जाएगा लेकिन पर्यटन निगम मरने जैसा हो जाए तो हैरत नहीं होगी। कुल जमा हालात यह है कि रोम जल रहा है और नीरो बंशी बजा रहे हैं...
छवि से डर गई सरकार ... ?
आईएएस अधिकारी छवि भारद्वाज के एक नसबंदी से जुड़े आदेश ने कमलनाथ सरकार को हिला कर रख दिया था। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जुड़ी छवि ने नसबंदी के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक कठोर आदेश निकाला जिसमें काम नहीं करने वाले कर्मचारियों को वेतन नहीं देने का भी जिक्र था। एक तो नसबंदी का लक्ष्य पूरा करना और ऊपर से असफल कर्मियों को वेतन नहीं देने की बात सरकार को लाल कपड़ा दिखाने जैसी हो गई। आदेश के दस दिन के भीतर पालन करने के बजाए जनसंख्या की रोकथाम करने वाली छवि भारद्वाज को पद से हटाकर मंत्रालय भेज दिया गया। इसके पीछे वो लोग बड़े खुश हैं जिन्हें छवि के कठोर और ईमानदार रवैये ने टेंडर से लेकर अन्य कामों में घपला करने से रोक रखा था। कुल मिलाकर सरकार और गड़बड़ी करने वाले खुश हैं।
राघवेंद्र सिंह