पुलवामा अटैक के इस सवाल पर अब तक है सस्पेंस

नई दिल्ली।पिछले साल पुलवामा में हुए आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवानों की शहादत के बाद सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में पांच लोगों को मार गिराया था। माना जाता है कि ये पांच लोग हमले के षड्यंत्रकारी थे। ऐसे में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के सामने अब तक चुनौती बनी हुई है कि आखिर इस हमले का असली मास्टरमाइंड कौन था। एनआईए के पास इस हमले के मुख्य आरोपी के बारे में अब तक कोई ठोस सूचना या साक्ष्य नहीं है।
सभी संदिग्ध आरोपियों की मौत के बाद पुलवामा अटैक से जुड़े कई सवाल आज भी अनसुलझे हैं। संदिग्‍धों की मौत के कारण पूरी साजिश का पता नहीं चल पा रहा है। अभी तक यह पता नहीं चल पाया कि कहां से इतना विस्‍फोटक आया था। इन्हीं सवालों का जवाब नहीं मिल पाने के चलते एनआईए अब तक इस मामले में चार्जशीट दाखिल नहीं कर पाई है। जबकि इस तरह के मामलों में 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल की जाती रही है। विपक्षी पार्टियां भी लगातार पूछ रही हैं कि आखिर इतने बड़े मामले में अबतक चार्जशीट क्यों नहीं दाखिल की गई है।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुलवामा हमले से जुड़े तीन सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा है, 'इस हमले की जांच में क्या सामने आया?, बीजेपी की सरकार के वक्त में यह हमला हुआ था, सुरक्षा में हुई चूक के लिए किसे जिम्मेदार ठहराया गया है?' उधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया है, 'पिछले साल भयानक पुलवामा हमले में अपनी जिंदगी गंवाने वाले शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। वे सभी असाधारण लोग थे, जिन्होंने हमारे राष्ट्र की सेवा और रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। भारत उनकी शहादत को कभी कभी नहीं भूलेगा।'
आपको बता दें कि साल 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले के बाद एनआईए का गठन किया गया था। एनआईए के एक अधिकारी ने बताया, 'मुंबई हमले की ही तरह पुलवामा अटैक की जांच भी अंधेरे में हाथ पैर मारने जैसा मामला रहा। यूं तो इस हमले के बारे में कई तरह की बातें कही जा रही थीं, लेकिन हर बात के लिए कानूनी पहलू का ध्यान रखना था।'
अधिकारी ने बताया कि पहली चुनौती तो आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार द्वारा हमले में इस्तेमाल की गई कार के असली मालिक का पता लगाना था। जबकि अमोनियम नाइट्रेट, नाइट्रो ग्लीसरीन और आरडीएक्स जैसे विस्फोटकों से लदा वाहन नष्ट हो गया था।
उन्होंने बताया कि हालांकि फॉरेंसिक पद्धतियों और बहुत ही सावधानीपूर्वक की गई जांचों से कार के सीरियल नंबर का पता लगाया गया और कुछ ही समय में वाहन के मालिकाना हक का शुरू से अंत तक पता कर लिया गया। जबकि इस विस्फोट में कार के परखच्चे उड़ गए थे। हालांकि, कार का अंतिम मालिक एवं अनंतनाग जिला स्थित बिजबेहरा निवासी सज्जाद भट 14 फरवरी के (पुलवामा) आतंकी हमले से कुछ ही घंटे पहले लापता हो गया और जैश ए मोहम्मद आतंकी संगठन में शामिल हो गया। वह पिछले साल जून में एक मुठभेड़ में मारा गया।
उन्होंने बताया, ‘यह स्पष्ट है कि आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार था लेकिन यह साक्ष्य से भी स्थापित करना पड़ा। विभिन्न स्थानों से मानव अवशेषों को जुटा कर उन्हें डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए भेजा गया।’
अधिकारी ने बताया, ‘आत्मघाती हमलावर की पहचान कर ली गई और कार के मलबे से लिए गए डीएनए के नमूनों का उसके पिता के डीएनए से मिलान कर पुष्टि की गई।’
उन्होंने कहा कि मुदसीर अहमद खान, कारी मुफ्ती यासीर और कामरान सहित अन्य षड्यंत्रकारियों की भूमिका उजागर हुई, लेकिन वे सभी सुरक्षा बलों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए। पिछले साल 10 मार्च को खान, 29 मार्च को कामरान, 18 जून को सज्जाद मारा गया जबकि कारी इस साल 25 जनवरी को मुठभेड़ में मारा गया।
जैश ए मोहम्मद के प्रवक्ता मोहम्मद हसन के एक विडियो में इस हमले की उसके संगठन द्वारा जिम्मेदारी लेने के बाद इसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया और इंटरनेट प्रोटोकॉल पते से पाकिस्तान स्थित एक कंप्यूटर से इसे जारी किए जाने के बारे में जानकारी मिली। अधिकारी ने कहा कि जांच के दौरान एनआईए ने जैश ए मोहम्मद के सदस्यों की सक्रियता के एक अन्य मामले का पता लगाया। उन्होंने बताया, ‘इस मामले में आरोप पत्र में अब तक आठ लोगों को नामजद किया गया है।’