मिलिए करॉना के 'सुपर स्प्रेडर' से, कोरिया से लेकर स्पेन तक फैलाया संक्रमण

लंदन।ब्रिटेन में एक व्यक्ति की जोर-शोर से तलाश की जा रही थी। यह कोई डॉन या भगोड़ा अपराधी नहीं था, बल्कि इस पर आरोप है कि इसने अनजाने में कई लोगों को करॉना वायरस से संक्रमित कर दिया। अब तलाश पूरी हो चुकी है और यह शख्स इस समय लंदन के एक अस्पताल में है। पेशे से व्यवसायी स्टीव वॉल्श (53) खुद करॉना के संक्रमण से आजाद हैं और उन्हें क्वॉरनटाइन सेंटर में रखा गया है, लेकिन अब तक वह कई देशों में यह संक्रमण फैला चुके हैं।
दरअसल, वह जनवरी में ब्रिटेन के गैस ऐनालिटिक्स फर्म सर्वोमेक्स के सेल्स कॉन्फ्रेंस में पहुंचे थे और वहीं करॉना से संक्रमित हुए। शुरुआत में माना गया कि यहां शामिल हुए चीनी प्रतिनिधिमंडल ने यह संक्रमण फैलाया, लेकिन सर्वोमेक्स का कहना है कि उनके टेस्ट पॉजिटिव नहीं पाए गए थे। सर्वोमेक्स ने 'सुपर स्प्रेडर' के नाम से मशहूर हो गए वॉल्श की तस्वीर जारी की है। 
सिंगापुर के आलीशान हयात होटल में 109 प्रतिनिधि मौजूद थे। वे यहां चीनी डांसर्स के परफॉर्मेंस का लुत्फ ले रहे थे, लेकिन कुछ समय बाद ही उन्हें अहसास हुआ कि वे एक वैश्विक संकट के केंद्र में आ गए हैं क्योंकि यहां से वापस मलयेशिया लौटे एक व्यक्ति में करॉना के लक्षण पाए गए। इसके बाद इस कॉन्फ्रेंस में शामिल सभी लोगों को अलग-थलग रखने की व्यवस्था हुई, लेकिन 109 में से 94 लोग अपने देश लौट चुके थे। इससे जानलेवा करॉना वाइरस फैलता चला गया।
सिंगापुर कॉन्फ्रेंस में शामिल होने आए साउथ कोरिया के दो नागरिक मलयेशियाई मरीज के संक्रमण से बीमार हुए और उन्होंने यह बीमारी अपने दो और रिश्तेदारों में पास कर दिया। कॉन्फ्रेंस में आए तीन और को संक्रमित पाया गया, जिसके बाद यूरोप में इसका मामला सामने आया। इस कॉन्फ्रेंस में वॉल्श भी मौजूद थे।
वॉल्श कॉन्फ्रेंस पूरी करने के बाद पत्नी के साथ फ्रांस छुट्टी पर चले गए। उनके संपर्क में आए ब्रिटेन में उनके चार दोस्त करॉना से संक्रमित हो चुके थे। वहीं, फ्रांस में उनके साथ स्की जेट शेयर करने वाले पांच और ब्रिटिश इसके संक्रमण में आए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। वाल्श के संपर्क में आए स्पेन के एक नागरिक को घर वापस आने पर खुद के संक्रमित होने का पता चला। वाल्श तब तक 11 लोगों में करॉना पहुंचा चुके थे।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ के ग्लोबल आउटब्रेक अलर्ट ऐंड रेस्पॉन्स नेटवर्क के अध्यक्ष प्रफेसर डेल फिशर ने कहा कि जैसे-जैसे समय गुजर रहा है इसका पता लगाना कठिन है कि वहां वायरस किससे आया। उन्होंने कहा, 'हम खुद बेहद असहज महसूस करते हैं जब हम किसी मरीज को किसी बीमारी से पीड़ित पाते हैं और जानना कठिन होता है कि यह कहां से आया है।' फिशर और अन्य विशेषज्ञ इसकी तुलना सार्स के संक्रमण की एक घटना से करते हैं जब 2003 में हॉन्ग कॉन्ग के एक होटल में ठहरे चीनी डॉक्टर से यह संक्रमण पूरे दुनिया में फैल गया था।