रोमांचक सफ़र : जब पूरे प्रदेश में 'पांव-पांव वाले भइया' के नाम से मशहूर हो गए शिवराज

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का एक छोटे से गांव से निकल कर मुख्यमंत्री बनने तक का सफर काफी रोमांचक है। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में नर्मदा नदी के किनारे जैत नाम के छोटे से गांव के किसान परिवार में जन्मे शिवराज की कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं रही है। कम उम्र में ही शिवराज ने अपने परिवार के खिलाफ जाकर गरीब मजदूरों की हक के लिए लड़ाई शुरू कर दी थी। 

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शिवराज सिंह चौहान अपने संसदीय क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने और लोगों के दिलों में जगह बनाने के लिए हमेशा अपने क्षेत्र का दौरा करते थे। इस दौरान वो किसी गाड़ी या अन्य साधन का इस्तेमाल करने के बजाए पदयात्रा करते थे। उन्होंने कई बार अपने संसदीय क्षेत्र में पदयात्राएं की। जब पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने तब भी वे किसी न किसी गांव में जाकर ग्रामीणों से चर्चा किया करते थे। उनके इसी अंदाज के कारण वे विदिशा के बाद पूरे प्रदेश में 'पांव-पांव वाले भइया' के नाम से मशहूर हो गए।
18 जुलाई 2019 को शिवराज सिंह चौहान की दत्तक पुत्री पुत्री भारती की असमय मौत हो गई थी। बेटी की मौत की खबर लगने के बाद शिवराज की पत्नी साधना सिंह बेटे कार्तिकेय के साथ तुरंत भोपाल से विदिशा पहुंच गईं थी। अगले दिन 19 जुलाई को शिवराज भी विदिशा अपने दामाद और बेटी के परिजनों से मिलने विदिशा गए थे। परिवार को सांत्वना देते समय शिवराज की आंखे भर आई थीं। भारती की 1 मई 2018 को शादी हुई थी। शिवराज सिंह ने पत्नी साधना के साथ भारती का कन्यादान किया था। पिछले साल 25 मई को शिवराज सिंह चौहान के पिता प्रेम सिंह (82) निधन हो गया था।

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मुख्यमंत्री बनने के बाद शिवराज सिंह चौहान पर सबसे पहला आरोप डंपर खरीद का लगा था। आरोप था कि उनकी पत्नी साधना सिंह के नाम पर कथित तौर पर चार डंपर खरीदे गए थे, जो फाइनेंस कराकर सीमेंट कंपनी में लगाए गए थे। हालांकि, इस मामले में शिवराज को कोर्ट से क्लीन चिट मिल गई थी। इसके बाद व्यापमं ऐसा घोटाला है, जिसमें आज भी तरह-तरह की बातें बनती रहती हैं। दूसरी तरफ शिवराज पर खनिज माफ़िया को कथित तौर पर संरक्षण देने का आरोप भी लग चुका है।

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प्रदेश का मुखिया बनने से पहले शिवराज पांच बार सांसद रहे। पहली बार अटल बिहारी वाजपेयी के विदिशा सीट छोड़ने पर 10वीं लोकसभा के लिए (1991) में, 11वीं लोकसभा (1996) में शिवराज विदिशा से दोबारा सांसद चुने गए। 12वीं लोकसभा के लिए 1998 में विदिशा क्षेत्र से ही वे तीसरी बार, 1999 में 13वीं लोकसभा के लिए चौथी बार और 15वीं लोकसभा के लिए विदिशा से ही पांचवी बार सांसद चुने गए। उनसे पहले अर्जुन सिंह और श्यामाचरण शुक्ल तीन-तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं।
शिवराज सिंह चौहान 2005 में सीहोर की बुधनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। इसके बाद यहीं से 2008, 2013 और 2018 में विधायक चुने गए। 2003 विधानसभा चुनाव में राघौगढ़ से दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए थे। ये शिवराज के राजनीतिक जीवन की पहली हार हुई थी। इसके पहले 1990 में बुधनी से ही विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं।