कोरोना : सोशल डिस्टेंसिंग समझाने सड़क पर उतरीं ममता बनर्जी, निशान बनाकर बताया कैसे दूर रहें

कोलकाता।कोरोना के कारण जारी लॉकडाउन के बीच पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी गुरुवार को खुद जागरूकता फैलाती दिखीं। कोलकाता के एक सब्जी बाजार में ममता बनर्जी जमीन पर गोला बनाकर लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग समझा रही थीं। चेहरे पर रुमाल बांधे ममता बनर्जी ने लोगों को दूर-दूर रहने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने को कहा। वहीं, ममता बनर्जी ने 18 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को चिट्ठी लिखकर कहा है कि उनके राज्यों में मौजूद बंगाल के लोगों को बुनियादी सुविधाएं दी जाएं।

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कोरोना से बचने के लिए डॉक्टर्स और एक्सपर्ट्स की सलाह है कि लोग सोशल डिस्टेसिंग का पालन करें। इसका मतलब है कि लोग एक-दूसरे से कम से कम मिले जुलें और मिलने पर भी कम से कम एक मीटर की दूरी बनाए रखें। लोगों को यही समझाने के लिए ममता बनर्जी खुद कोलकाता के एक बाजार में पहुंच गईं और लोगों के साथ-साथ अधिकारियों को भी निर्देश दिए।

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सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए सब्जी की दुकान के बाहर एक व्यक्ति ईंट से निशान बना रहा था। ममता बनर्जी ने उस व्यक्ति से ईंट ले ली और खुद सड़क पर गोला बनाने लगीं। गोला बनाने के साथ-साथ वह लोगों को भी समझाती रहीं कि इसी गोले में खड़े हों और दूर-दूर रहें। वह खुद लगभग एक मीटर की दूरी पर कई गोले बनाती रहीं और लोगों को समझाती रहीं कि सोशल डिस्टेंसिंग कितनी जरूरी है।
दूसरी तरफ ममता बनर्जी ने देश के 18 राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर राज्य के उन श्रमिकों को सहायता पहुंचाने का आग्रह किया है, जो कोरोना वायरस महामारी के कारण लॉकडाउन के बाद जगह-जगह फंस गए हैं। ममता बनर्जी ने पत्र में लिखा, 'बंगाल के कई कामगार देश के विभिन्न हिस्सों में काम कर रहे हैं जिनमें अर्द्ध कुशल और अकुशल दोनों श्रेणी के हैं। देश में कोविड-19 महामारी की वजह से पूरी तरह बंद के कारण पश्चिम बंगाल के कई कामगार वापस नहीं आ सके और विभिन्न जगहों पर फंस गए हैं।'
ममता बनर्जी का यह पत्र महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, केरल, दिल्ली, ओडिशा, कर्नाटक और पंजाब के मुख्यमंत्रियों को मिला है। इसमें ममता बनर्जी ने कहा, 'हमें सूचना मिली है कि बंगाल के मूल निवासी ऐसे कई श्रमिक आपके राज्य में भी फंसे हुए हैं। हमें उनके लिए आपात स्थिति में फोन आ रहे हैं।' मुख्यमंत्री ने कहा कि सामान्य तौर पर वे 50-100 के समूह में हैं और स्थानीय प्रशासन आसानी से उन्हें पहचान सकता है। उन्होंने कहा, 'हम उन्हें कोई मदद नहीं पहुंचा सकते, इसलिए मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि कृपया अपने प्रशासन को उन्हें संकट के इस समय में बुनियादी आसरा, भोजन और चिकित्सा सहायता मुहैया कराने को कहें। हम बंगाल में में फंस गए ऐसे लोगों की देखभाल कर रहे हैं।'