बंगाल से आए, छिंदवाड़ा की जनता का खून चूसकर उद्योगपति बने कमलनाथः विष्णुदत्त शर्मा

भोपाल। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कांग्रेसी कह रहे हैं कि वे तो नंगे-भूखे घर से हैं। कमलनाथ तो बंगाल से आकर छिंदवाड़ा की जनता का खून चूसकर उद्योगपति बने हैं। वे क्या जानें प्रदेश के गरीब, किसानों का दुख। उन्होंने न तो कभी गरीबी देखी है और न ही कभी गांव देखे हैं। ये बातें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा ने शनिवार को गुना जिले की बमौरी विधानसभा में जनसभा को संबोधित करते हुए कही। 
विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि अब कमलनाथ कह रहे हैं कि उनका क्या कसूर है? तो उन्होंने इतने कसूर किए हैं कि गिनाते-गिनाते सुबह हो जाएगी। उन्होंने प्रदेश के गरीब किसानों को धोखा दिया है तो माताओं-बहनों और बेटियों के लिए चलाई जाने वाली योजनाओं को बंद कर दिया। हमारी संस्कृति में जो भी भांजे-भांजियों के साथ छल करता है तो वह सड़कों पर आ जाता है।  कमलनाथ ने भी प्रदेश के भांजे-भांजियों के साथ छलकपट किया था तो उनको ज्योतिरादित्य सिंधिया और महेंद्र सिसौदिया सड़कों पर लेकर आ गए।
विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने हमेशा पैसों का रोना रोया है। उनके कारण संपूर्ण मध्यप्रदेश एवं प्रदेश की जनता, किसान प्रभावित हुए हैं। उन्होंने गरीबों के कल्याण की योजनाओं को ही बंद कर दिया। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी तो हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए प्रदेश को 2 लाख 45 हजार घर दिए। इसमें 25 प्रतिशत पैसा प्रदेश को मैचिंग ग्रांट मिलानी पड़ती है, लेकिन कमलनाथ ने पैसा नहीं दिया। इसके कारण गरीबों से उनका आशियाना छिन गया।
शर्मा ने कहा कि कोरोना महामारी जब प्रदेश में पैर पसार रही थी उस समय कांग्रेस की सरकार थी। लेकिन तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ आईफा अवार्ड की तैयारियों में लगे हुए थे। कोरोना महामारी को लेकर उन्होंने कोई चिंता नहीं की। इनकी बैठकें भी आईफा अवार्ड को लेकर होती रहीं और अब इन्होंने अपना एक और वचन पत्र जारी किया है, जिसमें कह रहे हैं कि कोरोना में जो लोग गए हैं उनके परिजनों को सरकारी नौकरी देंगे। यदि उस समय ही आईफा अवार्ड की लालसा छोड़कर कोरोना वायरस की चिंता कर लेते तो इतने लोगों को भी जान नहीं गंवानी पड़ती। इनके पास नाचने-गाने वालों के लिए तो करोड़ों रूपए थे, लेकिन प्रदेश के गरीबों के आवास के लिए पैसा नहीं था, बेटियों को पढ़ाने के लिए पैसा नहीं था, गरीब की मौत पर कफन के लिए पांच हजार रूपए नहीं था। इन्होंने गरीबों के अधिकार छीने हैं। विष्णुदत्त शर्मा ने कहा कि यह उपचुनाव कोई सामान्य उपचुनाव नहीं है। ये उपचुनाव प्रदेश को बचाने का उपचुनाव है।