उपचुनाव: नाम वापसी के बाद प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर 355 प्रत्याशी मैदान में

भोपाल। मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर 3 नवंबर को होने वाले उपचुनाव की तस्वीर साफ हो गई है। सोमवार को नाम वापसी का आखिरी दिन था। प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर 355 प्रत्याशी मैदान में हैं। इसमें 35 ने सोमवार को अपना नॉमिनेशन वापस ले लिया है। सबसे ज्यादा सुरखी से 7 लोगों ने नाम वापस लिए हैं। निर्वाचन आयोग ने सोमवार को देर रात प्रत्याशियों के नामों की फाइनल लिस्ट जारी कर दी।
अब सबसे ज्यादा 38 प्रत्याशी मेहगांव विधानसभा सीट पर हैं। यहां पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस के हेमंत कटारे और बागी ओपीएस भदौरिया के बीच है। भदौरिया भाजपा सरकार में मंत्री हैं। यहां से दो प्रत्याशियों ने अपना नाम वापस लिया है। मंत्री गोविंद सिंह राजपूत की सीट सुरखी से उनके समेत कुल 15 उम्मीदवार भाग्य आजमा रहे हैं। यहां पर 7 प्रत्याशियों ने अपना वापस लिया है। वहीं, सबसे कम 3 प्रत्याशी बदनावर सीट किस्मत आजमा रहे हैं। यहां पर राजवर्धन सिंह दत्तीगांव भाजपा सरकार में मंत्री हैं और उनका मुकाबला कांग्रेस के कमल पटेल से है।
सभी 28 सीटों पर मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच है। बसपा ने सभी 28 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं। इसमें बसपा ग्वालियर-चंबल की करीब 10 सीटों पर असरदार साबित हो सकती है, यहां पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की उम्मीद है।
अब जिन 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव होना है, उनमें से 27 पर पहले कांग्रेस का कब्जा था और सरकार में वापसी करने के लिए उसे इन सभी सीटों पर पूरी ताकत लगाना होगी। 230 सदस्यीय राज्य विस में बहुमत के लिए 116 सीटें होना जरूरी हैं। दांगी के निधन के बाद मप्र विधानसभा की सदस्य संख्या 202 रह गई है। कांग्रेस के पास 88 विधायक बचे हैं तो भाजपा के पास 107 विधायक हैं। बसपा-सपा व निर्दलीय विधायकों में से ज्यादातर जिसकी सरकार होगी, उसके साथ रहने के बयान दे चुके हैं।
मध्य प्रदेश में 28 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव होने हैं। प्रदेश में 10 मार्च को कांग्रेस के 22 विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था और कमलनाथ सरकार को अल्पमत में लाकर गिरा दिया था। इस घटनाक्रम के बाद 12 जुलाई को बड़ा मलहरा से कांग्रेस विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी और 17 जुलाई को नेपानगर से कांग्रेस विधायक सुमित्रा देवी कासडेकर ने भी कांग्रेस छोड़ भाजपा ज्वाइन कर ली। 23 जुलाई को मांधाता विधायक ने भी कांग्रेस से दूरी बना ली। इस तरह अभी तक 25 विधायकों ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया है। वहीं तीन विधायकों का निधन हो गया है।
ग्वालियर-चंबल की जिन सीटों पर उपचुनाव होने वाले है, उनमें से मेहगांव, जौरा, सुमावली, मुरैना, दिमनी, अंबाह, भांडेर, डबरा,करैरा और अशोकनगर सीट पर बसपा पूर्व के चुनावों में कभी न कभी जीत दर्ज कर चुकी है।
2018 के विधानसभा चुनाव में गोहद, डबरा और पोहरी में बसपा दूसरे नंबर पर रही है। वही ग्वालियर, ग्वालियर पूर्व, और मुंगावली में उसकी मौजूदगी नतीजों को प्रभावित करने वाली साबित हुई है। मुरैना में बीजेपी की पराजय में बसपा की मौजूदगी प्रमुख कारण रहा था। इसके अलावा पोहरी, जौरा, अंबाह में बसपा के चलते भाजपा तीसरे नंबर पर पहुंच गई थी। इस बार के चुनाव में भी मुरैना, जोरा, दिमनी, अंबाह, मेहगांव, भांडेर,पोहरी सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय होने की पूरी संभावना है।
डेढ़ साल पहले विधानसभा आम चुनाव में बसपा ने ग्वालियर-चंबल की 16 सीटों पर निर्णायक वोट हासिल किए थे। इनमें अंबाह 22179, अशोकनगर 9559, करैरा 40026, ग्वालियर 4596, ग्वालियर पूर्व 5446, गोहद 15477, डबरा 13155, दिमनी 14458, पोहरी 52736, भांडेर 2634, मुंगावली 14202, मुरैना 21149, मेहगांव 7579, बमोरी 7176, सुमावली 31331 एवं जौरा में बसपा प्रत्याशी को 41014 वोट मिले थे।