हुनर-हाट में दिखेगा प्रदेश के जिलों का खास हुनर

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि महिला सशक्तिकरण के प्रतीक अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के कार्यक्रम यादगार बनाए जायें। इनका संदेश दूर तक जाना चाहिए। कार्यक्रम सिर्फ कर्मकांड न हों बल्कि महिलाओं को सशक्त बनाने के कार्य भी निरंतर किए जायें। मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यक्रमों में संघर्ष से सफलता तक पहुँची महिलाएँ स्वयं अपनी कहानी कहें। कार्यक्रमों का स्वरूप ऐसा हो, जिसे याद रखा जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला दिवस पर वे राजधानी में विभिन्न क्षेत्रों की सफल महिलाओं के साथ पौधरोपण में शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री ने आज मंत्रालय में हुई बैठक में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को हो रहे दो प्रमुख राज्य स्तरीय कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। प्रथम कार्यक्रम हुनर-हाट भोपाल हाट में पूर्वान्ह 10.30 बजे से होगा। दूसरा प्रमुख कार्यक्रम नेहरू स्टेडियम में दोपहर 3 बजे से होगा। इसमें ग्रामीण स्व-सहायता समूहों को 200 करोड़ का ऋण वितरण किया जाएगा। हुनर-हाट की तर्ज पर जिलों में भी कार्यक्रम होंगे।
बैठक में मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास मनोज श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास अशोक शाह, आयुक्त जनसंपर्क डॉ. सुदाम खाडे उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला दिवस पर लग रहे हुनर-हाट का प्रत्येक दायित्व महिला सम्हाले, ऐसे प्रयास किए जायें। महिला सशक्तिकरण की प्रतीक कामयाब महिलाएँ मंच पर रहें। अन्य जन-प्रतिनिधि और अधिकारी दर्शक दीर्घा में रहें। प्रशासन, खेल, राजनीति, समाजसेवा, उद्योग आदि क्षेत्रों में कार्यरत कामयाब महिलाएँ मंचासीन हों।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हुनर-हाट में 8 से 10 मार्च तक विभिन्न स्व-सहायता समूहों की परिश्रमी और हुनरमंद महिलाओं द्वारा तैयार उत्पाद सभी को खरीदना चाहिए। ये हुनर-हाट जिलों में भी लग रहे हैं। जन-प्रतिनिधि, अधिकारी, नागरिक समूहों की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में सहयोग करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकल को वोकल बनाने में भी सहयोग करें। स्व-सहायता समूहों के कार्य को विश्व तक पहुँचायें। कोदो-कुटकी के व्यंजन, खिलौने, घरेलू उपयोग की वस्तुओं, श्रंगार सामग्री और कलात्मक वस्त्रों की खरीद करें और समूहों को मार्केटिंग का लाभ दिलवाकर उनके उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पहुँचायें।
तीन दिवसीय हुनर-हाट में करीब 50 स्व-सहायता समूह उत्पाद लेकर आएंगे। जिन जिलों से अधिक संख्या में समूह आ रहे हैं उनमें बालाघाट और डिण्डौरी से सात-सात, पन्ना और मंडला से पाँच-पाँच समूह शामिल हैं। इसके अलावा रायसेन, बड़वानी, अनूपपुर, सतना, उमरिया जिले भी सक्रिय भागीदारी कर रहे हैं। प्रमुख उत्पादों में डिण्डौरी से कोदो-कुटकी, पॉवरलूम वस्त्र और गोंडी चित्रकला, अनूपपुर से शहद, सीहोर से काष्ठशिल्प, मण्डला से वस्त्रकला शामिल हैं। समूहों के स्टॉल पर उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय होगा। बैठक में जानकारी दी गई कि महिला दिवस के अवसर पर ग्राम सभाओं का आयोजन भी हो रहा है।