कोरोना का कहर, महाराष्ट्र समेत इन 5 राज्यों के करीब 80 हजार बच्चे एक माह में चपेट में आए

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की दूसरी लहर बच्चों और युवाओं पर भी कहर बरपा रही है. जबकि बुजुर्गों और गंभीर रोगों से ग्रसित लोगों को कोरोना वायरस का ज्यादा जोखिम माना जाता है. देश में कोरोना वायरस से संक्रमित बच्चों में ज्यादातर स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राएं हैं. जबकि पांच साल से कम उम्र के ज्यादातर बच्चे अपने परिजनों के जरिये महामारी की चपेट में आए हैं. कोरोना से सर्वाधिक प्रभावित ज्यादातर राज्यों ने स्कूल-कॉलेज दोबारा बंद कर दिए हैं. कोचिंग स्थानों पर भी रोक लगा दी गई है. साथ ही कोरोना वायरस की वैक्सीन का कार्य तेजी से चल रहा है.
केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के डेटा के अनुसार, 5 राज्यों में 79,688 बच्चे पिछले एक माह में कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं. फिलहाल दुनिया में बच्चों के लिए कोई विशेष वैक्सीन नहीं है. AstraZeneca वैक्सीन का बच्चों पर परीक्षण ब्रिटेन में रोक दिया गया है. यूरोपीय संघ में वैक्सीन के बाद रक्त का थक्का जमने को लेकर 7 लोगों की मौतें हुई है.
महाराष्ट्र में 60,684 बच्चे 1 मार्च से 4 अप्रैल के बीच कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं. इनमें से 9882 बच्चे 5 साल से कम उम्र के हैं. छत्तीसगढ़ में 5940 बच्चे कोरोना से संक्रमित हुए हैं, जिनमें 922 पांच साल से कम उम्र के हैं. कर्नाटक में 7327 बच्चे महामारी की चपेट में इस दौरान आए हैं, जिनमें 871 पांच साल से भी छोटे हैं. यूपी में 3004 बच्चे एक महीने में कोरोना से संक्रमित हुए हैं, जिनमें 471 पांच साल से भी कम आयु वर्ग के हैं.
रक्त के थक्के बनने की चिंता के बीच ब्रिटेन में 30 वर्ष से कम उम्र के लोगों को वैक्सीन का दूसरा विकल्प मिलेगा. ब्रिटेन की एक स्वास्थ्य समिति ने सिफारिश की है कि 18 से 29 वर्ष के आय़ु वर्ग के युवाओं को एस्ट्राजेनेका की जगह कोरोना की दूसरी वैक्सीन का विकल्प मिलना चाहिए.कोरोना वैक्सीनलेने के बाद खून का थक्का जमने की बढ़ती चिंताओं की बीच ये सलाह दी गई है. ब्रिटिश सरकार की वैक्सीन पर बनी सलाहकारी संस्थान ने ये सिफारिश की है.