ब्रिटिश सरकार ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पित करने की मंजूरी दी

नई दिल्ली।ब्रिटिश सरकार ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पित करने की मंजूरी दे दी है.इसे करीब 20 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक धोखाधड़ी करके फरार हुए कारोबारी को भारत लाने की मुहिम की बड़ी कामयाबी माना जा रहा है. इससे पहले ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने प्रत्यर्पण कीयाचिका मंजूर कर ली थी और इस मामले को स्वीकृति के लिए गृह मंत्री को भेज दिया था. मोदी सरकार लंबे समय से नीरव मोदी के अलावा इसी मामले में वांछित मेहुल चोकसी और ब्रिटेन में ही रह रहे विजय माल्या को भारत लाने का प्रयास कर रही है.
हालांकि नीरव मोदी के पास अभी भी भारत प्रत्यर्पित किए जाने के आदेश को कानूनी चुनौती देने का आखिरी विकल्प मौजूद होगा. नीरव मोदी पर पंजाब नेशनल बैंक समेत अन्य बैंकों को एलओयू के माध्यम से हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है. ब्रिटिश सरकार  की गृह मंत्री प्रीति पटेल ने नीरव मोदी को भारत प्रत्यर्पित करने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इससे पहले ब्रिटेन की वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने प्रत्यर्पण कीयाचिका मंजूर कर ली थी और इस मामले को स्वीकृति के लिए गृह मंत्री को भेज दिया था.
उसने एलओयू यानी बैंक गारंटी का गलत इस्तेमाल कर अकेले पंजाब नेशनल बैंक को करीब 14 हजार करोड़ रुपये का चूना लगाया था. इस मामले के खुलासे के बाद से ही वह फरार चल रहा था. वेस्टमिंस्टर कोर्ट ने फरवरी  2021 में जब नीरव मोदी की प्रत्यर्पण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी थी. ब्रिटिश अदालत ने कोरोना की महामारी के दौरान उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ने और भारत में जेलों की खराब हालत जैसी दलीलों को खारिज कर उसे भारत प्रत्यर्पित किए जाने पर मुहर लगाई थी.
कोर्ट ने कहा था कि यह नहीं माना जा सकता कि नीरव मोदी किसी वैध कारोबार में लिप्त है. उसके लेनदेन में कोई वैध कारोबार नहीं पाया गया है और यह माना जा सकता है कि इसमें बेईमानी की गई है. इनमें से कई मामले भारत की अदालतों में लंबित हैं. कोर्ट इस बात को लेकर आश्वस्त है कि साक्ष्यों के आधार पर उसे वहां दोषी साबित किया जा सकता है. प्रथमदृष्टया यह मनी लांड्रिंग यानी काले धन को सफेद करने का मामला लगता है.