नगरों की प्लानिंग में ठेले वालों और छोटा व्यवसाय करने वालों के लिए स्थान निर्धारित हो : चौहान

भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि शहरों में स्वच्छता और व्यवस्था चाहिए, पर गरीब की रोजी-रोटी का सही इंतजाम सर्वोपरि है। शहरों में उद्योग स्थापित हों पर इसके साथ ही हाथठेला वालों के लिए भी उचित व्यवस्था हो। शहरों की प्लानिंग में छोटे-छोटे व्यवसाय करने वालों, ठेले वालों के लिए स्थान निर्धारित किया जाना आवश्यक है।
मुख्यमंत्री  नगरीय‍ विकास एवं आवास विभाग द्वारा जन-कल्याण और सुराज अभियान में प्रदेश के 24 नगरों में 1056 करोड़ रुपये की लागत से किए गए 69 विकास कार्यों के मिंटो हॉल में आयोजित वर्चुअल लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में 15वें वित्त आयोग की 299.40 करोड़ की राशि का सिंगल क्लिक से 402 नगरीय निकायों को वितरण किया। लोकार्पित कार्यों में सीवरेज परियोजना, पेयजल योजना, बस स्टेण्ड विकास, कमर्शियल कॉम्पलेक्स, उद्यानों का विकास, ट्रेफिक मैनेजमेंट, लायब्रेरी, शाला भवन, सोलर एनर्जी और प्रधानमंत्री आवास योजना में निर्मित आवास परिसर शामिल हैं। 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत नगरीय निकाय जारी ग्रांट का उपयोग स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, पेयजल पूर्ति, और जल संरक्षण पर करेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों का आकार लगातार बढ़ रहा है। प्रदेश की 30 प्रतिशत से ज्यादा आबादी अब शहरी क्षेत्र में रह रही है, यह संख्या और बढ़ेगी। शहरों को गंदगी, प्रदूषण, बीमारी, अपराध और मा‍फिया मुक्त बनाने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। शहरी क्षेत्र में सर्वोच्च प्राथमिकता स्वच्छता की है। स्वच्छता के मामले में मध्यप्रदेश सर्वश्रेष्ठ राज्य है। स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 में प्रदेश ने एक पायदान की छलांग लगाकर लगातार देश में तीसरा स्थान प्राप्त किया। इंदौर शहर ने चौथी बार सबसे स्वच्छ शहर का स्थान प्राप्त किया है। भोपाल देश की स्वच्छतम स्व:संवहनीय राजधानी है। स्मार्ट सिटी मिशन में राष्ट्रीय स्तर पर 11 अवार्ड मध्यप्रदेश को मिले हैं। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत प्रदेश के 296 निकाय ओडीएफ प्लस आए हैं। इंदौर को देश का पहला वॉटर प्लस शहर होने का गौरव प्राप्त हुआ है। 300 से अधिक शहरों में स्त्रोत पर ही 100 प्रतिशत कचरे का पृथककरण, परिवहन व प्र-संस्करण तथा 75 प्रतिशत ठोस अपशिष्ठ का पुनर्चक्रण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवास एक बड़ी जरूरत है। हमने संकल्प लिया है कि झुग्गीमुक्त शहरों के लिए हरंसभव प्रयास किया जाएगा। प्रत्येक व्यक्ति की अपनी पक्की छत हो, इस दिशा में राज्य सरकार निरंतर सक्रिय है। माफिया से मुक्त कराई गई जमीनों पर गरीबों के मकान बनाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 15 सालों के प्रयासों से शहरों के स्वरूप में बदलाव आया है। शहरों में व्यवस्थित जलापूर्ति परियोजनाएँ पूर्ण की गई हैं। सीवरेज प्रणाली को विकसित कर कार्यशील बनाया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना में लगभग 58 हजार आवास शहरी गरीबों के लिए बनाए गए हैं। शहरों में रात्रिकालीन आश्रय स्थलों और दीनदयाल रसोई योजना की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन शहरों में सीवेज या जलापूर्ति के कार्य के संबंध में सड़कों की खुदाई हो, वहाँ सड़कों को तत्काल सुधारना सुनिश्चित किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नगरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बसों की संख्या को बढ़ाया गया है। नगरीय निकायों द्वारा प्रदाय की जा रही सभी नागरिक सेवाओं को ऑनलाइन किया गया है। ऑनलाइन भवन अनुज्ञा में लगने वाली समय-सीमा को 30 दिन से घटाकर 15 दिन किया गया है। कम्पाउंडिंग के संबंध में भी संशोधन पारित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आम नागरिकों को राहत देने की दृष्टि से सभी अवैध कॉलोनियों के नियमितिकरण की व्यवस्था की गई है। वर्तमान में बन रही कॉलोनियों तथा भविष्य में बनने वाली कॉलोनियों में जो बिल्डर मूलभूत सुविधाएँ नहीं देगा, उनके विरूद्ध कठोर कार्यवाही की जाएगी। सम्पत्ति कर और जल दर के संबंध में भारत सरकार के निर्देशानुसार आवश्यक संशोधन किए गए हैं।