मध्यप्रदेश :भाजपा में लामबन्द होते असंतुष्ट नेताओं को मिला ‘रघुनंदन’ का सहारा

27 विधानसभा उपचुनावों में भाजपा को कैसे अच्छी-खासी सफलता मिले इस पर चिंतन करने के बहाने पार्टी के असंतुष्ट नेता अब लामबन्द होने लगे हैं और वास्तव में यह लामबंदी सरकार व संगठन में वरिष्ठ नेताओं की हो रही उपेक्षा को लेकर है। अलग-अलग असंतोष के स्वर फूटने का सिलसिला तो शिवराज मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही प्रारंभ हो गया था लेकिन अब भी दलबदल का जो खेल जारी है और कांग्रेस से विधायक तोड़कर अपने पाले में लाने का प्रयास किया जा रहा है उससे पार्टी के अंदर एक धड़े में असंतोष सुलगने लगा है। 
असंतुष्टों को अब पूर्व राज्यसभा सदस्य रघुनंदन शर्मा का सहारा मिल गया है। इन नेताओं का मानना है कि उनकी पीड़ा की अभिव्यक्ति एवं उनकी चिन्ताओं का भोपाल से लेकर दिल्ली तक नेतृत्व के सामने शर्मा अधिक प्रभावी ढंग से प्रस्तुतीकरण कर सकते हैं। शर्मा प्रदेश के ऐसे नेता हैं जिनकी सीधी प्रधानमंत्री मोदी तक पहुंच है और जब मोदी 1998 के विधानसभा चुनाव के पूर्व प्रदेश प्रभारी रहे उस दौरान उनकी नजदीकियां मोदी से काफी बढ़ गयीं थीं। समझा जाता है कि शर्मा भी निष्ठावान नेताओं व कार्यकर्ताओं की पीड़ा को अब आगे बढ़ाने का मन बना चुके हैं।भाजपा के पूर्व राज्यसभा सांसद रघुनंदन शर्मा के निवास पर नाराज नेताओं की मीटिंग हुई जिसमें पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा, दीपक जोशी, युवा मोर्चा के पूर्व प्रदेश धीरज पटेरिया सहित वीडियो काल से कई और नेता उनसे जुड़े और शर्मा को अपनी पीड़ा से अवगत कराया। शर्मा ने बताया है कि उपचुनावों में शानदार जीत कैसे हो इस पर हम सब लोगों ने चर्चा की, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी माना कि सरकार व संगठन से वरिष्ठ नेताओं की संवादहीनता बनी हुई है तथा कई नेताओं की अनदेखी हो रही है। इन नेताओं का मानना है कि संवादहीनता की वजह से पहले मंत्रिमंडल गठन में देरी हुई, बाद में विभाग बंटवारे में देरी हुई और अब संगठन के गठन में भी देरी हो रही है। उपचुनावों से पहले इन नेताओं की अनदेखी दूर करना होगी एवं संवादहीनता समाप्त करना होगी तथा इन्हें सक्रिय करना होगा। शर्मा के अनुसार पार्टी की चिन्ता में सबने मंथन किया है। समझा जाता है कि इस बैठक में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आये नेताओं को सरकार व संगठन में पद देने की जो बातें चल रही हैं उस पर भी नाराजगी जताई गयी। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने वाले नेताओं को लेकर शर्मा मानते हैं कि जिस पार्टी का नेतृत्व “भारत तेरे टुकड़े होंगे“ जैसे गैंग के साथ हो वहां से लोग पार्टी छोड़कर आयेंगे ही। आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत पिछले दिनों मध्यप्रदेश में थे। अब कांग्रेस नेता पूर्व मंत्री विधायक सज्जन सिंह वर्मा ने उन्हें एक पत्र लिखा है जिसमें इस बात का उल्लेख किया है कि भागवतजी अब भारतवासियों को अपने शब्दकोष से राजनीति में शुचिता- राजनीतिक मूल्य- चाल-चरित्र-चेहरा, लोकतांत्रिक मूल्य-संविधान व संस्कृति की रक्षा जैसे शब्द निकाल देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने भागवत से पूछा कि क्या मैं एक ऐसा ही पत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिख दूं या आप उन्हें......।
अपने चौथे मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में शिवराज जो रिकार्ड बना रहे हैं उस पर व्यंग्य करते हुए राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष एडवोकेट जेपी धनोपिया ने कहा है कि कोरोना काल में नये रिकार्ड शिवराज बनाते जा रहे हैं। आज उन्होंने एक और कीर्तिमान बनाते हुए पहली वर्चुअल केबिनेट मीटिंग करने का काम किया। धनोपिया ने यह भी कहा है कि पहली बार प्रदेश में जनमत की नहीं सौदे की सरकार बनी है और पहली बार ही 14 गैर विधायकों को मंत्री बनाया है, यह भी एक नया रिकार्ड है।  
और अन्त में...
उपचुनावों में कांग्रेस दलबदल कर गये लोगों को बिकाऊ बताते हुए अपनी चुनावी थीम पर आगे बढ़ चुकी है। ग्वालियर में उसने मॉस्क भी तैयार कर लिए हैं जो कोरोना काल में कार्यकर्ताओं द्वारा बड़े पैमाने पर लगाये जायेंगे। अभी तो इन मॉस्कों को ग्वालियर-चम्बल संभाग में कार्यकर्ताओं को वितरित किया गया है, लेकिन ग्वालियर-चम्बल संभाग के लिए कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता के.के. मिश्रा का कहना है कि इन्हें अन्य सभी उपचुनावों वाले क्षेत्रों के कार्यकर्ता भी इन्हें लगायेंगे। इस मॉस्क पर सबसे ऊपर कमलनाथ का चित्र है उसके बाद बिकाऊ नहीं टिकाऊ चाहिये, फिर से कमलनाथ सरकार चाहिए लिखा हुआ है और दो कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पंजा लगाये गये हैं। कम्प्यूटर बाबा ने कांग्रेस के पक्ष में अपनी लोकतंत्र बचाओ यात्रा प्रारम्भ कर दी है। देवास में उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि जनता के साथ गद्दारी की गयी, आपके वोट को बेचा है, ये आपके गद्दार हैं और अधर्म के साथ बीजेपी खड़ी है। यह सन्त समाज का दायित्व है कि लोकतंत्र को बचाये। हम यह नहीं कह रहे कि किसे वोट दें, हम तो यह कह रहे हैं कि जो वोट बेंचे उसे कम से कम वोट नहीं देना। एक तरफ कम्प्यूटर बाबा लोकतंत्र बचाओ यात्रा निकाल रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर उनके गोमटगिरि और अंबिकापुरी स्थित आश्रम के लिए नगर निगम ने नोटिस थमा दिया है।
- अरुण पटेल