मध्यप्रदेश / उपचुनाव: मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम किसका लगाएंगे बेड़ा पार

29 नवंबर से पहले बिहार विधानसभा चुनाव  के साथ ही प्रदेश में विधानसभा की 27 सीटों पर उपचुनाव कराने का भारत निर्वाचन आयोग द्वारा ऐलान करने के साथ ही भाजपा और कांग्रेस  पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गई हैं क्योंकि अब यह साफ हो गया है कि कोरोना महामारी के चलते बदले हुए माहौल में चुनाव होंगे ही। अयोध्या में 5 अगस्त को भव्य राम मंदिर निर्माण का भूमि पूजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा करने के बाद जिस ढंग से प्रदेश में  श्रेय लेने की  कोशिश भाजपा और कांग्रेस ने प्रारंभ की उसको  देखते हुए लगता है कि उपचुनाव में इसका राजनीतिक फायदा लेने के प्रयासों में कोई भी पीछे नहीं रहेगा। भाजपा इसका पूरा श्रेय लेते हुए अपनी रणनीति बनाएगी तो कांग्रेस  भी इस मुद्दे को उठाने में कोई परहेज नहीं करेगी। भाजपा  रामशिला पूजन  यात्रा निकाल  रही है तो  यह देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस इसके काट में क्या करेगी? ऐसे माहौल में यह सवाल मौजू हो जाता है कि आखिर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम 27 चुनाव में दोनों में से किस का बेड़ा पार लगाते हैं? केंद्रीय पंचायत ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सांसद विष्णु दत्त शर्मा की जोड़ी ग्वालियर -चंबल  संभाग में उन 16 ही विधानसभा क्षेत्र के प्रमुख भाजपा कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद का अंतिम चरण पूरा कर चुकी है तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ 12 सितंबर को ग्वालियर में एक मेघा शो करने वाले हैं। अंचल में उनका दो दिन का प्रवास रहेगा। इस दौरान वह  ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़  ग्वालियर में अपनी ताकत दिखाने के साथ ही भाजपा पर तीखा हमला बोलेंगे  और कांग्रेस कर्ताओं का हौसला बुलंद करने की कोशिश  करेंगे।  सिंधिया ने कमलनाथ पर तंज कसते हुए कहा कि कमलनाथ के 15 माह का शो तो जनता देख चुकी है  अब वे यहां आकर जो करना चाहें करें।
29 नवंबर से पहले उपचुनाव होना है और इसी अवधि के बीच दशहरा तथा दीपावली के त्यौहार भी  आएंगे । इस कारण राम की जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का जो मार्ग प्रशस्त हुआ है वह प्रदेश में होने वाले इन चुनावों पर कितना असर डालेगा जब दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस राम नाम भी जोर शोर से लेंगे। राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट  की तर्ज यदि चुनावी  माहौल नजर  आने लगे तो इसमें किसी को भी कोई ताज्जुब नहीं होना चाहिए। जहां तक भाजपा का सवाल है उसकी जुबान पर राम नाम चढ़ना कोई नई बात नहीं है वह तो राम रंग में रंग कर ही लोकसभा में दो सांसदों वाली पार्टी से बढ़कर लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बन गई। लेकिन कांग्रेस में आया बदलाव एक बड़ा बदलाव माना जा सकता है। 2014 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की पराजय के बाद गठित एंटोनी कमेटी ने सिफारिश की थी कि कांग्रेस को अपनी पुरानी मूल उदार हिंदूत्व और सर्वधर्म समभाव की नीति पर वापस आना चाहिए। उसके बाद  कांग्रेस में भी धीरे-धीरे कुछ बदलाव नजर आने लगे हैं ।भाजपा  तो पहले से ही  राम रंग में रंगी हुई थी  लेकिन कमलनाथ  अपनी छवि एक बड़े हनुमान भक्तों की भी गढ़ रहे हैं  उनकी सरकार ने उन मुद्दों पर क्या-क्या किया जो  भाजपा के  हमेशा कोरे एजेंडा रहे हैं उसे चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस  भी उठाएगी ही। कमलनाथ  निजी जीवन में बड़े हनुमान भक्त हैं और वे अपने निर्वाचन क्षेत्र छिंदवाड़ा में सबसे बड़ी हनुमान मूर्ति की स्थापना कर कई वर्ष पूर्व उसकी प्राण प्रतिष्ठा भी करा चुके हैं। कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में जो वचनपत्र जारी किया था उसमें भी धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की बात थी। सत्ता की बागडोर संभालते ही मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने एक के बाद एक ऐसे मुद्दे जो हिंदुओं की आस्था और विश्‍वास से जुड़े हैं उन पर पूरी संजीदगी से अमल करना प्रारंभ किया। यहां तक कि तत्कालीन राज्यपाल लालजी टंडन ने भी राज्य सरकार द्वारा सनातन संस्कृति पर काम करने की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस दिशा में जिस तरह से मुख्यमंत्री ने काम प्रारंभ किया है उसकी प्रशंसा की जानी चाहिए। राज्यपाल ने हनुमान चालीसा को कमलनाथ द्वारा विश्‍व स्तर पर प्रचारित करने को पसंद किया।
 जिस प्रकार से कमलनाथ का भक्ति भाव और श्रद्धा प्रदेश के राजनीतिक पटल पर उभरकर सामने आ रही है लगता है कि उसका उद्देश्य बहुसंख्यक वर्ग में कांग्रेस के प्रति नये सिरे से आधार बनाना है। उनके तीन प्रयासों में खासकर श्रीलंका में सीता माता मंदिर, चित्रकूट का विकास और राम वन गमन पथ और हनुमान चालीसा को जिस ढंग से विश्‍व स्तर पर प्रचारित करने का प्रयास किया इसमें  शामिल हैं। कमलनाथ चुनाव जीतने के बाद अपने इस अभियान पर सधे हुए कदमों से आगे बढ़े और  योजनाएं बनी बजट आवंटन हुआ लेकिन सरकार 15 माह में ही गिर गई इसलिए उसका क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर नहीं हो पाया। उपचुनाव में कांग्रेस इन को पूरा करने का वायदा करेगी तो भाजपा  हर मामले में  वायदा खिलाफी की बात  जोर-शोर से उठाएगी ।ऐसा नहीं है की कमलनाथ के इन प्रयासों  से भाजपा अनजान है, उसके नेता कमलनाथ और कांग्रेस पर  तंज करने का कोई मौका हाथ से नहीं जाने देते और यह साबित करने की पूरी पूरी कोशिश करते हैं कि असली  राम भक्त तो वही हैं  और कांग्रेस नेता तो केवल दिखावा कर रहे हैं तथा उनकी स्थिति मुंह में राम बगल में छुरी जैसी है।
भाजपाइयों को सक्रिय करेगी तोमर- शर्मा की जोड़ी
ग्वालियर- चंबल में निष्ठावान भाजपाइयों और रूठे हुए भाजपाई कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का  काम केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा की जोड़ी कर रही है और वह मैदान में उतर गई है। भाजपा के सामने सबसे बड़ी समस्या अपने कार्यकर्ताओं को पूरी तरह सक्रिय करना तथा जो अनमने हैं उनको भी काम पर लगाना और बड़ी संख्या में कांग्रेसी आए नेता और कार्यकर्ताओं  के बीच तालमेल बैठाना है। इसका कारण यह है कि जो चुनावों में  भाजपा के उम्मीदवार होंगे वही पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से चुनाव जीते हैं और अब दल बदल कर भाजपाई हो गए हैं तथा इसी साल फरवरी माह तक वे खाटी कांग्रेस नेता थे। जिनको उन्होंने चुनाव में हराया उनको अब अपने पक्ष में चुनावी कार्य में लगाना है।  इस मामले में तोमर से बेहतर दूसरा कोई नेता इस अंचल में नहीं हो सकताहै ।  तोमर और शर्मा की जोड़ी ने इसलिए   यहां पर मोर्चा संभाला है क्योंकि 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव के समय  तोमर  प्रदेश भाजपा अध्यक्ष थे और पार्टी को बहुत अच्छी सफलता मिली थी। संगठन में मजबूत जमीनी नेटवर्क भी है। शर्मा विद्यार्थी परिषद में रहे हैं और यह माना जाता है की वह कुशल संगठन कर्ता भी हैं।  कार्यकर्ताओं से दोनों नेता प्रत्यक्ष संवाद कर रहे हैं और कितने सफल रहे यह उपचुनाव नतीजों से ही पता चल सकेगा।
 और यह भी...
कमलनाथ सरकार में और बाद में दल बदल कर शिवराज सरकार में भी राजस्व तथा परिवहन जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभालने वाले गोविंद सिंह राजपूत को अब  फिर से सुरखी विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की टिकट पर उप चुनाव लड़ना है और उन्होंने अपने क्षेत्र में रामशिला पूजन धार्मिक यात्रा के जरिए माहौल अपने पक्ष में बनाकर चुनावी वैतरणी पार करने की जुगत लगाई है। उन्होंने राम के सहारे चुनाव जीतने की रणनीति  पर चलने की सबसे पहले पहल कर क्षेत्रों में रामशिला पूजन का मन बना लिया है। कमलनाथ  अगस्त माह के पहले सप्ताह में ही राम मंदिर के निर्माण के लिए 11 चांदी की शिलाएं अयोध्या भेजने की घोषणा कर चुके हैं।
- अरुण पटेल