मध्यप्रदेश : उपचुनाव / कमलनाथ के मंथन से निकले कांग्रेस के पंद्रह योद्धा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तथा पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के तीन स्तरीय सर्वे के मंथन से उपचुनावों के लिए कांग्रेस के 15 योद्धा निकले हैं, जो अधिकतर उन उम्मीदवारों का मुकाबला करेंगे जिन्होंने पिछला विधानसभा चुनाव कांग्रेस टिकट पर लड़ा था और बाद में त्यागपत्र देकर भाजपा में शामिल हो गए, जिसके कारण उपचुनाव हो रहे हैं। यह कहा जा सकता है कि कांग्रेस ने जिन उम्मीदवारों की घोषणा की है उसमें से अधिकांश ऐसे हैं जिनसे बेहतर शायद कोई अन्य उम्मीदवार कांगेस के पास नहीं था। अभी 12 और उम्मीदवारों के नामों का ऐलान होना बाकी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सांसद विष्णु दत्त शर्मा और सांसद  ज्योतिरादित्य सिंधिया तो पहले से ही मैदान में उतरकर चुनावी माहौल बनाने के अभियान में भिड़ गए थे और आज शनिवार को कमलनाथ भी अंततः मैदान में कूद गए । आगर  विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने कांग्रेस के चुनाव प्रचार अभियान का आगाज भी कर दिया। 
कांग्रेस की केंद्रीय राजनीति में फिर से पूर्व मुख्यमंत्री  सांसद दिग्विजय सिंह की पूछ- परख बढ़ गई है और उन्हें कांग्रेस कार्यसमिति, जो कि पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारण समिति होती है उसका स्थाई आमंत्रित सदस्य अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बनाया है। विधानसभा के उपचुनाव तो विभिन्न उम्मीदवारों के बीच ही होंगे लेकिन इसके साथ ही कांग्रेस और भाजपा के कुछ बड़े नेताओं की जमीनी पकड़, राजनीतिक ताकत और चुनाव जिताऊ क्षमता का भी पता चल जाएगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार रहेगी या नहीं इसका फैसला उपचुनाव में होना है इसके साथ ही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया तथा कांग्रेस में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह के लिए उपचुनाव में अपनी-अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को जिताना नाक का सवाल बन गया है। विष्णु दत्त शर्मा के प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें पहली  राजनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
 दोनों पार्टी के कुल मिलाकर पांच नेताओं की प्रतिष्ठा सीधे-सीधे दांव पर लगी है, क्योंकि प्रदेश की राजनीति में इनकी पकड़ कितनी है इसका एहसास कराने वाले उपचुनाव के नतीजे ही होंगे। लंबी-चौड़ी मशक्कत और सर्वे के आधार पर जिन 15 प्रत्याशियों पर कांग्रेस ने मोहर लगाई है उनमें से कितनों पर जन स्वीकृति की मोहर लगती है उस पर ही प्रदेश में कांग्रेस और  कमलनाथ की आगे की दिशा और दशा तय होगी।  शिवराज सरकार रहेगी या नहीं इसका रास्ता ग्वालियर- चंबल संभाग से होकर गुजरने वाला है क्योंकि सर्वाधिक 16 उपचुनाव इसी अंचल में होना हैं और यही कारण है कि कांग्रेस व भाजपा दोनों ही इस अंचल में अपनी पूरी ताकत लगाएंगे। भाजपा यहां अपनी ताकत काफी दिनों से दिखा रही है जबकि कमलनाथ ने अपने चुनाव प्रचार अभियान का आगाज मालवा अंचल के आगर विधानसभा क्षेत्र से किया है। इसके पूर्व उन्होंने नलखेड़ा में मां बगलामुखी की पूजा अर्चना कर  बड़ोद में  जनसभा की। कल रविवार को कमलनाथ सांवेर में चुनावी बिगुल फूकेंगे। शिवराज की तुलना में कमलनाथ के सामने चुनौती काफी बड़ी है। भाजपा यदि 10 सीट भी जीत लेती है तो उसकी सरकार बनी रहेगी जबकि कांग्रेस को अधिकांश सीटें अपनी झोली में डालना होंगी तभी कांग्रेस और कमलनाथ का फिर से सत्ता में आना संभव हो पाएगा, इसलिए उन्हें हर सीट पर एड़ी-चोटी का जोर लगाना होगा।         
 दिग्विजय सिंह को कुछ बरसों बाद पुनः कांग्रेस की राष्ट्रीय कार्यसमिति में लिया गया है। इसके साथ ही अब राष्ट्रीय फलक पर कांग्रेस की राजनीति में फिर से सक्रिय भूमिका निभाने का  अवसर उन्हें मिल गया है। वैसे इस बात का संकेत पहले ही मिल गया था जब बिहार विधानसभा चुनाव के सिलसिले में पहली वर्चुअल रैली में वह मुख्य वक्ता बने। दिग्विजय उत्तर प्रदेश, असम, बिहार, अविभाजित आंध्र और कर्नाटक जैसे कुछ अन्य प्रमुख राज्यों के प्रभारी महासचिव रह चुके हैं। उन्हें कार्यसमिति में लेने  के बाद ग्वालियर-चंबल संभाग में हो रहे उपचुनावों में कांग्रेस उम्मीदवारों को और अधिक फायदा मिल सकेगा। यह अंचल उनकी कर्मभूमि है और कांग्रेस में दिग्विजय बड़े कद के नेता हैं। कांग्रेस के उम्मीदवारों का चुनावी वैतरणी पार करना उन पर और कमलनाथ पर ही निर्भर है। ज्योतिरादित्य के विरोध के चलते ही दिग्विजय धीरे-धीरे कांग्रेस की राजनीति में हाशिए पर चले गए थे। लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव के पूर्व कांग्रेस हाईकमान ने दिग्विजय को फिर से प्रदेश की राजनीति में सक्रिय किया और उन्हें चुनाव प्रबंधन और समन्वय  का दायित्व सौंपा। उस दौरान दिग्विजय ने कांग्रेस की जीत की पटकथा लिखने में अहम भूमिका अदा की।           
    कांग्रेस ने अपनी पहली सूची चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के पहले ही जारी कर दी। पार्टी हमेशा कहती रही है कि उम्मीदवारों की घोषणा चुनाव से काफी पहले करेंगे लेकिन पहली बार वह ऐसा कर पाई है। कांग्रेस और भाजपा की चुनाव प्रबंधन शैली में एक मौलिक अंतर यह है कि भाजपा में चुनावी जमावट संगठन करता है और कांग्रेस में यह कवायद उम्मीदवार को करना होती है। पहले घोषणा करने से   उम्मीदवारों को एक फायदा यह होगा की उन्हें तैयारियां और मैदानी  जमावट करने के लिए काफी समय मिल जाएगा  और जहां कहीं कोई असंतोष होगा उसे दूर करने में मदद मिलेगी, यदि कहीं बदलाव की जरूरत है तो पार्टी वह भी कर सकेगी। दो-तीन अपवादों  को छोड़कर अधिकांश चेहरे ऐसे हैं जो चुनावी मुकाबले को  दिलचस्प बना सकते हैं। 
भाजपा ने भले ही घोषणा नहीं की है पर यह खुला संकेत दे दिया है कि कांग्रेस से आने वाले पूर्व विधायकों को ही उम्मीदवार बनाया जाएगा इसलिए भाजपा को केवल आगर-मालवा और जौरा में ही उम्मीदवार के लिए मशक्कत करना है बाकी जगह तो उसे  रेडीमेड उम्मीदवार  ही मिले हैं। कांग्रेस में उम्मीदवारों के चयन में केवल और केवल जीत की संभावना तथा  कौन बेहतर से बेहतर उम्मीदवार हो सकता है इसे ही ध्यान में रखा गया है। कमलनाथ ने कांटे से कांटा निकालने की जुगत की है। कांग्रेस की पहली सूची में 7 नए चेहरे हैं तो 6 ऐसे नेताओं को  भी टिकट मिला है जो या तो फिर से कांग्रेस में आए हैं या अन्य दलों में रहने के बाद कांग्रेस में आए हैं। 5 युवा चेहरों पर भी कांग्रेस ने दांव लगाया है। इस प्रकार 14 क्षेत्रों में असली चुनावी मुकाबला किन चेहरों के बीच होगा यह साफ हो गया है।       
दिलचस्प चुनावी मुकाबला सांवेर में होने वाला है जहां कांग्रेस के विधायक और सांसद रहने के बाद में भाजपा होते हुए  अब प्रेमचंद गुड्डू फिर से कांग्रेस टिकट पर अपने पुराने निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। तुलसी राम सिलावट कांग्रेस से भाजपा में गए हैं और अब उस दल के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे। सिंधिया के खासमखास सिलावट के मुकाबले के लिए इस क्षेत्र में गुड्डू से अच्छा कोई दूसरा चेहरा कांग्रेस के पास नहीं था। कांग्रेस के 15 उम्मीदवारों में  रविंद्र सिंह तोमर  दिमनी, सत्य प्रकाश सखवार अम्बाह,  मेवाराम जाटव गोहद,   सुरेश  राजे डबरा (भाजपा की संभावित उम्मीदवार और कमलनाथ  तथा बाद में शिवराज सरकार में समाज कल्याण मंत्री इमरती देवी के समधी हैं), सुनील शर्मा ग्वालियर, फूल सिंह बरैया भांडेर, प्राज्ञीलाल जाटव करेरा, प्रेमचंद गुड्डू सांवेर, कन्हैयालाल अग्रवाल बम्होरी, आशा दोहरे अशोकनगर, विश्‍वनाथ सिंह कुंजाम अनूपपुर, मदनलाल अहिरवार सांची, विपिन वानखेड़े आगर,  रणबीर सिंह बघेल हाटपिपलिया और रामकिशन पटेल नेपानगर शामिल हैं।
और यह भी...      
उपचुनावों में कमलनाथ ने  गहन मंथन के बाद जो 15 चुनावी योद्धाओं के रूप में सूरमा चुनावी समर में उतारे हैं उनमें से कितने सच्चे सूरमा साबित होते हैं और कितने शोले फिल्म के दिलचस्प किरदार सूरमा भोपाली बनकर रह जाते हैं, यह चुनाव नतीजों से ही पता चल सकेगा।
- अरुण पटेल