मध्यप्रदेश /बजट सत्र : नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ की होगी अग्नि परीक्षा

पिछले वर्ष डेढ़ साल की कमलनाथ सरकार के दल बदल के कारण हट जाने शिवराज सिंह चौहान विश्वास मत प्राप्त करने  के बाद यह विधानसभा का पहला सत्र होगा जिसमें सदन का नजारा बदला- बदला नजर आएगा और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ बदली हुई भूमिका में आमने- सामने होंगे। बतौर नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ प्रतिपक्ष का नेतृत्व कर रहे होंगे तो वहीं शिवराज सदन का नेता होने के कारण सत्ता पक्ष की आसंदी पर सामने बैठे हुए नजर आएंगे। वैसे बीच में दो सत्र आहूत किए गए थे लेकिन कोरोना संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए सदन की कार्यवाही सत्ता पक्ष और विपक्ष ने आम सहमति से टाल दी थी। इस प्रकार पहला बड़ा कामकाजी सत्र 22 फरवरी से प्रारंभ होगा। मुख्यमंत्री के रूप में तो कमलनाथ के प्रदर्शन (परफारमेंस) को सदन में देखा जा चुका है लेकिन अब बतौर नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ के नेतृत्व की अग्नि परीक्षा का दौर शुरू होगा। इसमें खरे उतरने के बाद ही उनकी इस भूमिका में निखार आ पाएगा। यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि शिवराज सरकार की अपने विधायकों के साथ वह कितनी  तगड़ी घेराबंदी  करते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा करने में सफल हो पाते हैं । 
2003 के बाद यह पहली विधानसभा होगी जिसमें कांग्रेस एक सशक्त और मजबूत प्रतिपक्ष के रूप में नजर आएगी। देखने वाली बात यही होगी कि वह विधानसभा में सरकार की कितनी घेराबंदी कर उसे जनता की नजरों में कटघरे में खड़ा कर पाती है। मुद्दों की उसके पास कमी नहीं है केवल उसे आक्रामक अंदाज में उठाने का सवाल है। सत्र की समाप्ति के बाद ही कहा जा सकेगा कि अपनी इस भूमिका में वह कुछ अधिक कर पाती है या नहीं, या फिर अपने बदले हुए अंदाज ए बयां तथा तीखे तेवरों के साथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और उनके साथी कांग्रेस को बगलें झांकने को मजबूर कर देते हैं। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस की बढ़ती हुई कीमतों के साथ ही बढ़ती महंगाई, जहरीली शराब से  उज्जैन  और मुरैना आदि में लोगों की मौत तथा सीधी जिले में हुई बस दुर्घटना में मृतकों की संख्या 53 हो जाने के कारण इस मामले को लेकर भी कांग्रेस विधायक अच्छा-खासा हंगामा खड़ा करने का शायद ही कोई अवसर हाथ से जाने दें। इसके साथ ही किसानों की कर्ज माफी और बिजली के दामों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर भी सदन में आरोपों और प्रत्यारोप की गूंज हो सकती है। कांग्रेस विधायकों की कोशिश यही होगी कि वह परिवहन मंत्री गोविंद सिंह राजपूत को अपने निशाने पर लेते हुए उनके त्यागपत्र की मांग करें। क्योंकि कुछ माह के अंतराल को छोड़ दिया जाए तो कमलनाथ और शिवराज सिंह चौहान की सरकार में राजपूत ही परिवहन मंत्री हैं। राजपूत के घटनास्थल पर ना पहुंचने का मामला भी कांग्रेस उठाएगी। दुर्घटना के दिन शिवराज ने अपने 2 दिन के सारे कार्यक्रम स्थगित कर दिए थे और  घटनास्थल पर जाकर मृतकों के परिजनों से मिले थे और उन्हें सांत्वना प्रदान की थी। कड़े  प्रशासनिक कदम उठाये और जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज भी गिरी। लेकिन परिवहन मंत्री राजपूत एक भोज में भाग लेते हुए प्रसन्न मुद्रा में नजर आ रहे थे। इस मामले को सदन के बाहर  कांग्रेस नेताओं ने काफी तूल देते हुए राजपूत के इस्तीफे की मांग  की थी। विपक्ष के सर्वाधिक निशाने पर परिवहन और गृह विभाग होंगे तथा कानून व्यवस्था की स्थिति तथा बस दुर्घटना को लेकर सबसे ज्यादा जोरदार विपक्ष के हमले इन्हीं दो विभागों पर होंगे। राजपूत कांग्रेस से भाजपा में गए हैं इसलिए उनको ही घेरने में सर्वाधिक जोर कांग्रेस  विधायक लगाएंगे। इसके साथ ही  ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ जो कांग्रेसी विधायक त्यागपत्र देकर भाजपा में गए थे और   मंत्री बन गए हैं उनको भी कांग्रेस विधायक अपना निशाना बना सकते हैं। सत्ता पक्ष के विधायक और मंत्री भी मुंह तोड़ जवाब देने में कोई कोताही करने वाले नहीं है इसलिए सदन के अंदर हंगामा और आरोप-प्रत्यारोपों की झड़ी लगने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है।
स्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी में कांग्रेस 
22 फरवरी से प्रारंभ होकर 26 मार्च तक चलने वाले बजट सत्र में कुल 23 बैठकें होंगी। कांग्रेस सीधी जिले में हुई बस दुर्घटना को लेकर स्थगन प्रस्ताव लाने की तैयारी में है और उसका प्रयास है कि इस मामले पर इस प्रस्ताव के जरिए सदन में चर्चा कराई जाए। रविवार 21 फरवरी को प्रस्तावित सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस इस बात पर जोर देगी कि सरकार उसके प्रस्ताव पर सदन में चर्चा कराने के लिए तैयार हो जाए। अभी तक लगभग डेढ़ दर्जन के आसपास स्थगन प्रस्ताव की सूचनाएं विधानसभा सचिवालय को मिल चुकी हैं तथा संख्या और बढ़ने की संभावना है। विधानसभा सचिवालय को 5000 से अधिक  प्रश्न  प्राप्त हो चुके हैं। सत्र के पहले दिन विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव होगा और उसके बाद राज्यपाल आनंदी बेन पटेल अपना अभिभाषण देंगीं।
और यह भी...
कांग्रेस द्वारा डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस के बढ़ रहे दामों  को लेकर आज 20 फरवरी को आयोजित आधे दिन के प्रदेश व्यापी बंद का मिलाजुला असर देखने को में नजर आया। कहीं कम तो कहीं बंद का अधिक असर रहा। 21 फरवरी को इंदौर में कांग्रेस का कार्यकर्ताओं का संभागीय सम्मेलन हो रहा है। इस प्रकार मैदान में उतरने के बाद  22 फरवरी से कांग्रेस विधायक विधानसभा में जोर-शोर से जन सरोकार से जुड़े मुद्दे उठाने जा रहे हैं। आज के प्रदेश बंद को सफल निरूपित हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने आरोप लगाया है कि महंगाई से राहत के नाम पर सत्ता में आई भाजपा आज जनता को रोज महंगाई की आग में झोंक रही है।
पेट्रोल-डीजल व रसोई गैस के दामों में हो रही बेतहाशा वृद्धि से आम जनता बेहद परेशान है और  राहत की मांग कर रही है लेकिन भाजपा सरकार मौन है ? इस मूल्यवृद्धि पर कांग्रेस के आह्वान पर प्रदेश बंद को सफल बनाने के लिए प्रदेश की जनता का आभार आभार व्यक्त करते हुए चेतावनी के लहजे में कमलनाथ ने कहा है कि कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी  तथा  वह जनहित की यह लड़ाई जारी  रखेगी। कमलनाथ का कहना है कि कि महंगाई से राहत दिलाने के नाम पर भाजपा सत्ता में आई थी लेकिन सत्ता में आते ही वह महंगाई बढ़ाने वाली सरकार बन चुकी है और पेट्रोल-डीजल के दामों में निरंतर वृद्धि हो रही है, पिछले 11 दिनों से लगातार इनके दामों में वृद्धि हुई है, वहीं रसोई गैस के दाम भी फरवरी माह में ही दो बार 75 रुपये बढ़ाकर जनता की कमर तोड़ने का काम भाजपा की सरकार ने किया है। महंगाई की इस मार से आम जनता बेहद परेशान है और करों में कमी कर राहत की मांग कर रही है लेकिन जो भाजपा विपक्ष में पेट्रोल-डीजल व रसोई गैस के दामों में मूल्यवृद्धि के विरोध में बड़े-बड़े आंदोलन करती थी, भाजपा नेता खूब साइकिल चलाते थे,बैलगाड़ी यात्रा निकालते थे, बड़े-बड़े लच्छेदार भाषण देते थे, वह सभी आज मैदान से गायब हैं। अब इस बारे में एक शब्द भी नहीं बोल रहे हैं और जनता को कोई राहत प्रदान नहीं कर रहे हैं। उल्टा जनता के घावों पर मलहम लगाने की बजाय ये भाजपा नेता उन्हें कभी पैदल चलने की, कभी साइकल से चलकर स्वस्थ रहने की उल-ज़लूल सलाह दे रहे हैं और इस मूल्यवृद्धि को जायज़ ठहरा रहे है। कमलनाथ कह रहे हैं कि मध्यप्रदेश में पेट्रोल पर 33% वैट, 4.50 रुपये अतिरिक्त कर और 1% प्रति लीटर सेस लगता है और वहीं डीजल पर 23% वेट, 3 रुपये अतिरिक्त और 1% प्रतिशत सेस लगता है। इन भारी भरकम करो के माध्यम से सरकार का खजाना तो रोज़ फल-फूल रहा है लेकिन जनता लुटती जा रही है।
- अरुण पटेल