मध्यप्रदेश : सरकार की मनभर आलोचना के बीच छंटाक भर प्रशंसा भी...

जो भी पार्टी सरकार में होती है कुप्रबन्ध और भ्रष्टाचार को लेकर विपक्ष मीडिया और जनता में उसकी खूब आलोचना होती है। पिछले दस दिनों में जितना जमकर भादों बरसा है उतना शायद तीस सालों में कभी नही। इस कठिन मौके पर कसौटी पर कसे जा रहे हैं चौथी बार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। बात शनिवार की रात की है प्रदेशभर से भारी बारिश की खबरों के बीच मुख्यमंत्री हवाई दौरा करने के बाद अपने आवास को ही बाढ़ पीड़ितों को राहत देने के कंट्रोल रूम में तब्दील कर देते हैं। यहीं से शुरू होती है सरकार की आलोचनाओं के बीच प्रशंसा की बात। रात्रि जागरण का दौर है। मुख्यमंत्री बैचेन हैं बाढ़ में टापू बने गांवों की सुरक्षा और दूध मुहें बच्चों और बूढ़े व बीमार लोगों की हिफाजत के लिए।
भोपाल में मुख्यमंत्री का आवास। रात के करीब 11 बजे हैं। भयंकर बाढ़ के बीच हवाई निरीक्षण कर लौटे शिवराज सिंह लगातार गांव गांव में अपने सम्पर्को से मिल रही सूचनाओं पर अफसरों को सक्रिय कर रहे हैं। असल में भारी बारिश के बीच दिन में ही रायसेन, सीहोर और होशंगाबाद जिले को हवाई यात्रा कर जलमग्न इलाकों को देख समझ लेते ही हैं कि रात तक हालात बेकाबू हो सकते हैं। लिहाजा कोई बड़ी दुर्घटना हो उसके पहले पूर्वानुमान लगा राज्य और केंद्र के बाढ़ बचाव दलों के साथ सेना को मैदान में उतार देते हैं। फोन पर संभागायुक्त से लेकर कलेक्टर को सीधे बचाव के निर्देश दिए जा रहे थे। मुख्यमंत्री के मैदानी नेटवर्क और तजुर्बे का फायदा अफसरों को सक्रिय करने से लेकर पीड़ितों को मदद मिलने तक हो रहा था। दोपहर से शाम तक सेना हेलीकाप्टर से दर्जनों परिवारों को सुरक्षित शिविरों में भेजने के साथ उनके रहने और भोजन पानी के इंतजाम किए जा रहे थे। मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र बुदनी से लेकर एनडीआरएफ - एसडीआरएफ की टीमें पुलिस के साथ जलमग्न इलाकों से लोगों को बचाने में लगी थी। शाम ढलने के साथ रात में नाव और मोटरबोट के जरिए लोगों को डूब क्षेत्र से बाहर निकाला जा रहा था। करीब 1000 गांवों से लगभग दस हजार पीड़ितों को केम्पों में भेजा गया था। रविवार को भी दिनभर यह सिलसिला जारी था।
असल मे शिवराज सिंह के मंत्रालय में बैठने से फील्ड में रहने का लाभ बाढ़ पीड़ितों की मदद करने में खासा काम आया। हम अक्सर उनके फील्ड रहने की आलोचना करते थे मगर बाढ़ के मामले में उनका फील्ड में रहने का अनुभव प्रशासन की उस टीम को भी सहायक रहा जो मैदान में तैनात है। मिशन बाढ़ राहत में लगी टीम जब बार बार सीएम से यह आग्रह करती कि आप विश्राम कर लें हम सब राहत के काम में लगे हुए हैं। लेकिन मुख्यमंत्री आवास में उनके आफिस से लेकर एंटी चेम्बर और शयनागार तक फील्ड से आ रहे बाढ़ संकट के सन्देशों पर उनके निर्देशों का सिलसिला रात के चौथे पहर तक जारी था। इस बीच विदिशा सांसद रमाकांत भार्गव भी ग्रामीण कार्यकर्ताओं के साथ बचाव कार्य मे लगे देखे गए। 
अगले दो दिन पश्चिमी मध्यप्रदेश याने मालवा इंदौर, उज्जैन से लेकर निमाड़ में भारी बारिश के अनुमान के बीच शिवराज सिंह रविवार को हवाई दौरे पर निकल गए और रात में फिर अफसरों के अगली रणनीति में जुट गए। जाहिर है कि बारिश के अगले खतरनाक होते दौर में वे अधिकारियों की टीम को संभावित इलाकों में मुस्तैद करने में व्यस्त हो गए। इस दौरान उन्होंने कमिश्नर- कलेक्टर को फसलों की नुकसानी का सर्वे करने के लिए भी तैयार रहने को कहा है। बाढ़ का पानी उतरने के साथ ही फसलों की बरबादी का जायजा लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बारिश के दौरान बुखार, उल्टी- दस्त जैसी बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ विभाग को प्रभावित इलाकों में दवा वितरण के साथ पंचायत व नगरीय प्रशासन महकमें को सफाई करने के निर्देश दिए हैं। ऐसा कई सालों बाद दिख रहा है कि मुसीबत आने के पहले सीएम अफसरों में कसावट ला रहे हैं । अक्सर इस तरह के मामलों में सरकार मीडिया में आलोचना के बाद जागती देखी जाती थी। इस मामले में खास बात यह है कि सीएम वन मेन आर्मी की तरह काम कर रहे हैं। पूरी आपदा में राजस्व और स्वास्थ मंत्री ज्यादा सक्रिय नजर नही आ रहे हैं। बहुत सम्भव है ये मंत्री विधानसभा उप चुनाव को देखते हुए अपनी सीट सुरक्षित करने में व्यस्त हों। इस सबके लिए मुख्यंत्री ने कह दिया हो , मैं तो हूं न...
खराब मौसम और बादलों में फंसे शिवराज...
शनिवार की शाम की घटना है मुख्यमंत्री शिवराज सिंह बाढ का हवाई सर्वे कर रहे थे। तभी घनघोर बारिश, घने बादल और कड़कती बिजली के उनका हेलीकाप्टर फंस गया था। होशंगाबाद के आसपास नर्मदा तट की घटना है। डगमगाते और बादलों में फंसे हेलीकॉटर में बैठे लोगों के चहरों पर एक बारगी चिंता की लकीरें उभर आई थीं। पायलट ने भी खतरे को भांपते हुए कहा कि आगे चार्ज पार्टिकल्स हैं। बिजली से भरे बादलों में आगे जाने से हालात बिगड़ भी सकते हैं। इसके बाद हेलीकाप्टर का रुख राजधानी की तरफ किया गया। इस बीच सीएम ने भोपाल आ कर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से सेना की सराहना करते हुए और भी मदद की मांग की। उन्होंने बाढ के विकट हालात से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी विस्तृत जानकारी दी। इसके बाद रविवार को फिर निकल गए उड़न खटोले में सूबे के बाढ़ पीड़ितों का हाल जानने के लिए...
राघवेंद्र सिंह